इस बार रबी के सीजन में किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। एक तो मानसून की वक्त से पहले विदाई ने जमीन की नमी छीन ली, ऊपर से डीएपी की किल्लत ने बचा-खुचा हौसला तोड़ दिया। नतीजा यह कि जहां नवंबर के पहले हफ्ते तक राज्य में 38 फीसदी रबी की फसलें बो दी जाती थीं, वहां इस बार यह आंकड़ा महज 9 फीसदी पर अटक गया है। गेहूं व जौ की बुआई एक फीसदी का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई है। वहीं सरसों की बुआई भी पिछले साल से 50% तक कम है। पिछले साल इस समय तक 74 प्रतिशत बुआई हो गई थी लेकिन इस साल यह आंकड़ा 24 फीसदी ही पहुंचा है। किसान पानी देने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन खाद न मिलने से बुआई थम गई है। जमीन में नमी नहीं, बांधों में भी पानी कम : कृषि विभाग के एडिशनल डायरेक्टर त्रिलोक जोशी का कहना है कि बारिश कम होने से नमी नहीं है। पाली, सिरोही सहित कई जिलों में खेत खाली हैं। बांधों में भी पानी कम होने से किसान रबी फसल बुआई कम कर रहे है। असर...देर से फसल बुआई हुई तो पैदावार में 15-20% कमी की आशंका इस साल मानसून कमजोर होने की वजह से कृषि विभाग ने गेहूं की बुआई का लक्ष्य 1.50 लाख हेक्टेयर कम कर दिया। पिछले साल गेहूं का लक्ष्य 36 लाख हेक्टेयर था, लेकिन इस साल केवल 34.50 लाख हेक्टेयर ही लक्ष्य रखा गया है। फिर भी अभी तक केवल 11.5 हजार हेक्टेयर में ही बुआई हुई है। जबकि पिछले साल नवंबर के पहले सप्ताह तक 2.62 लाख हेक्टेयर में गेहूं बोया जा चुका था। 2025 बनाम 2026 की बुआई स्थिति 14 जिलों में सामान्य से भी बारिश, फसलों पर संकट : प्रदेश के 14 जिलों बालोतरा, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, डूंगरपुर, गंगानगर, हनुमानगढ़, जैसलमेर, जालोर, जोधपुर, कोटपूतली-बहरोड़, पाली, राजसमंद, सिरोही, उदयपुर में इस बार सामान्य से कम बारिश हुई है। गंगानगर व हनुमानगढ़ में नहरी पानी से सिंचाई होती है, ऐसे में यहां बुआई हो रही है। लेकिन जहां पर सिंचाई के साधन नहीं है, वहां बारिश की कमी से रबी फसल बुआई कम हो रही है। बुआई में क्यों पिछड़ गए किसान 1. जमीन सूखी क्यों?
अगस्त के बाद बारिश न होने से खेतों की ऊपरी परत में जो प्राकृतिक नमी होती है, वह पूरी तरह उड़ चुकी है। आमतौर पर किसान इसी नमी के दम पर सरसों और चने की सीधी बुआई कर देते हैं। इस बार किसानों को पहले खेत सींचने (पलेवा) पड़ रहे हैं, जिसमें समय और पानी दोनों ज्यादा लग रहे हैं। 2. खाद का गणित क्यों उलझा?
बुआई के वक्त पौधे की जड़ों को नाइट्रोजन और फास्फोरस की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, जो डीएपी से मिलती है। मंडियों और सहकारी समितियों के बाहर खाद के लिए लंबी लाइनें लगी हैं। समय पर खाद न मिलने से किसान बुआई टालने को मजबूर हैं। 3. देरी का उत्पादन पर क्या असर पड़ेगा?
नवंबर के दूसरे पखवाड़े तक गेहूं और सरसों की बुआई नहीं निपटी, तो आगे फरवरी-मार्च में तापमान बढ़ेगा, तब फसल पकने से पहले ही सूख सकती है। इससे पैदावार में 15 से 20% तक की गिरावट का खतरा है। देर से बुआई होने के कारण फसल पकने के समय से पहले गर्मी से दाने भी छोटे होंगे।