जिस एफएसएल (FSL) रिपोर्ट के आधार पर महिला अधिकारी को जेल भेजा गया, एसओजी (SOG) की जांच में उसी रिपोर्ट को तैयार करने के तरीके में गड़बड़ी सामने आई है। एफएसएल के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. रमेश चौधरी ने धोखाधड़ी के एक मामले में निर्दोषों को फंसाने के लिए सात साल पुराने हस्ताक्षरों का विवादित हस्ताक्षरों से मिलान कर उन्हें 'मिसमैच' करार दे दिया। नियम यह है कि विवादित हस्ताक्षरों का मिलान उनके तीन साल पहले या तीन साल बाद तक के हस्ताक्षरों से होना चाहिए। एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर जोधपुर की महामंदिर थाना पुलिस ने उदयपुर में तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी हेमलता कांकरिया को गिरफ्तार कर लिया था। रिहा होने के बाद कांकरिया ने पुलिसकर्मियों की शिकायत की, जिसके बाद एसओजी की जांच में मिलीभगत का पूरा खेल उजागर हो गया। गृह विभाग ने 13 अक्टूबर को सहायक निदेशक डॉ. रमेश चौधरी को चार्जशीट सौंपी है। (हेमलता, एसओजी के एएसपी मुकेश सोनी को दो करोड़ रुपये की घूस के मामले में ट्रैप कराने वाले निरंजन मोगरा की पत्नी हैं।) 2010 का रजिस्टर जब्त, फिर भी 2016 के हस्ताक्षर जांच के लिए भेजे धोखाधड़ी के मामले में 2 अगस्त 2021 को राजेंद्र सिंह ने महामंदिर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले में एफआर (Final Report) लगा दी। परिवादी ने एफआर को गलत बताते हुए 2010 के एक बेचाननामे में तत्कालीन नोटरी श्रवण कुमार ओझा के हस्ताक्षरों की एफएसएल जांच की मांग की। तत्कालीन जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि वर्ष 2010 का मूल नोटरी रजिस्टर पुलिस ने जब्त कर रखा है, फिर भी पुलिस ने 2016 के हस्ताक्षर जांच के लिए भेज दिए। रिपोर्ट देने वाले को चार्जशीट, गलत दस्तावेज भेजने वाले पुलिस अधिकारी पर जवाब-तलब वर्ष 2010 के हस्ताक्षर की जांच के लिए 3 साल पहले या 3 साल बाद के हस्ताक्षर के नमूने लेने होते हैं। लेकिन एफएसएल अधिकारी डॉ. रमेश चौधरी ने वर्ष 2016 के दस्तावेजों से मिलान कर 'मिसमैच' की रिपोर्ट दे दी। इस रिपोर्ट के आधार पर हेमलता और तीन अन्य आरोपी बन गए। बाद में हाईकोर्ट ने कार्रवाई पर स्टे लगा दिया। एफएसएल की गलत रिपोर्ट के आधार पर मुझे गिरफ्तार किया गया। इससे मेरी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हो गई (सामाजिक हत्या हो गई)। इस घटना के बाद मेरे बेटे की सगाई टूट गई। अब जांच में सब साफ हो गया है, लेकिन क्या सिर्फ चार्जशीट देना ही न्याय है? उन पुलिसकर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई जिन्होंने गलत दस्तावेज भेजे थे।— हेमलता कांकरिया