अगर मैं सरपंच होता तो पंचायत क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए विशेष प्रयास करता। महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर सिलाई, कढ़ाई, डेयरी, पशुपालन और लघु उद्योगों का प्रशिक्षण दिलवाता। साथ ही सरकारी योजनाओं एवं बैंक ऋण की जानकारी देकर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाता, ताकि महिलाएं घर बैठे भी आमदनी अर्जित कर सकें। महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार उपलब्ध करवाने के साथ बालिका शिक्षा, महिला सुरक्षा और स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देता। - हनुमान गुर्जर, पचेवर