जयपुर में सार्वजनिक परिवहन की बदहाली का बड़ा विरोधाभास सामने आया है। शहर के तीन प्रमुख रूटों पर 295 मिनी बसों को परमिट हैं, लेकिन चल सिर्फ 25 रही हैं। रूट नंबर-7 पर पहले हर 5 मिनट में बस मिलती थी, अब यात्रियों को 2 से ढाई घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। रूट नंबर-11 पर 150 बसों को परमिट हैं, लेकिन चल सिर्फ 8 रही हैं। रूट नंबर-55 पर 43 परमिट के बावजूद दिनभर में 4 से 5 बसें ही दिखाई देती हैं। दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि परकोटे, अजमेरी गेट, चौमू सर्किल, टोंक फाटक, ट्रांसपोर्ट नगर और भांकरोटा जैसे प्रमुख इलाकों में टेम्पो, मैजिक और ई-रिक्शा मिल जाते हैं, लेकिन बाहरी कॉलोनियों तक नियमित सार्वजनिक परिवहन नहीं है। नतीजा, यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। मजबूरी में ऑनलाइन ऑटो, बाइक टैक्सी या कैब बुक करनी पड़ रही है। 30 से 50 रुपए का सफर 150 से 250 रुपए तक में करना पड़ रहा है। अजमेरी गेट से खातीपुरा : बस से 50, कैब से 250 अजमेरी गेट से खातीपुरा रेलवे स्टेशन जाने के लिए पहले टोंक फाटक पहुंचकर रूट नंबर-7 या 55 की बस पकड़नी पड़ती है। पड़ताल में 30 मिनट इंतजार करना पड़ा। ऑनलाइन बाइक टैक्सी का किराया 117, ऑटो का 176 और कैब का 250 मिला। रात में किराया 50 तक बढ़ जाता है। बस से अधिकतम खर्च 50 रुपए है। रूट 7; 102 बसों को परमिट, चल रहीं 10 से 12; पहले हर 5 मिनट में थी बस कालवाड़ रोड के हाथोज से गोनेर रोड पर कुंदनपुरा से आगे तक करीब 40 किमी लंबे रूट नंबर-7 पर पहले हर 5 मिनट में बस मिलती थी। अब यात्रियों को 2 से ढाई घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। यहां 102 बसों को परमिट हैं, लेकिन दोपहर 3 से रात 9 बजे तक गोनेर से हाथोज की ओर 10 से 12 बसें ही मिलती हैं। ये सभी बसें सुबह 9 बजे तक हाथोज से गोनेर पहुंच जाती हैं। इसके बाद बस नहीं मिलती। यह रूट झोटवाड़ा, चौमूं पुलिया, रेलवे स्टेशन, टोंक रोड, गांधी नगर मोड़, बजाज नगर, मालवीय नगर और जगतपुरा पुलिया से गुजरता है। खातीपुरा रेलवे स्टेशन से गांधी नगर रेलवे स्टेशन या टोंक रोड जाने वाले यात्रियों को भी नियमित बस नहीं मिल रही। रूट-11; 150 बसों को परमिट, चल रहीं 8; एक स्टैंड पर 2 घंटे में पहुंचती है बस सीताबाड़ी-बैनाड़ रोड से पानीपेच, चांदपोल, सोडाला, मानसरोवर, सांगानेर और टोंक रोड होते हुए फागी रोड पर बीलवा तक करीब 50 किमी लंबा एकतरफा रूट है। इस पर 150 मिनी बसों को परमिट हैं, लेकिन अभी सिर्फ 8 बसें चल रही हैं। एक स्टैंड पर करीब 2 घंटे में बस पहुंचती है। गवर्नमेंट हॉस्टल से मालपुरा गेट के बीच पड़ताल में 30 से 40 मिनट इंतजार करना पड़ा। इस रूट पर बस का अधिकतम किराया करीब 40 रुपए है। बाइक टैक्सी का किराया 100 और ऑटो का 150 रुपए मिला। रात में करीब 40 रुपए अतिरिक्त देने पड़ते हैं। रूट-55; 43 बसों को परमिट, दिनभर में 4 से 5 ही दिखती हैं करीब 40 किमी लंबा यह रूट महात्मा गांधी अस्पताल से टोंक रोड, इंडिया गेट, हल्दीघाटी, सांगानेर, एसएमएस अस्पताल, रेलवे स्टेशन, चौमूं पुलिया और सीकर रोड होते हुए विश्वकर्मा रोड नंबर-17 तक जाता है। इस रूट पर 43 निजी बसों को परमिट हैं, लेकिन दिनभर में 4 से 5 बसें ही दिखाई देती हैं। टोंक रोड पर पहुंचने के बाद इंडिया गेट से एसएमएस अस्पताल तक लो-फ्लोर बसें मिल जाती हैं। मैजिक और टेम्पो भी उपलब्ध हैं। सबसे ज्यादा परेशानी महात्मा गांधी अस्पताल से टोंक रोड पहुंचने में होती है। शहर बढ़ा, लेकिन बसों का नेटवर्क बाहरी कॉलोनियों तक नहीं पहुंचा जगतपुरा, प्रताप नगर, सीतापुरा, खोह-नागोरियान, मानसरोवर की पत्रकार कॉलोनी, भारतमाता सर्किल, वाटिका, भांकरोटा और सिरसी रोड के आसपास आवासीय कॉलोनियों का विस्तार हुआ है। बड़ी संख्या में लोग इन इलाकों से नौकरी, कारोबार और पढ़ाई के लिए रोजाना शहर के दूसरे हिस्सों में जाते हैं। मुख्य सड़क से घर तक पहुंचने के लिए निजी साधन लेने या पैदल चलने की मजबूरी है। सवाल है कि परमिट वाली बाकी बसें कहां हैं और निर्धारित रूटों पर क्यों नहीं चल रहीं? इसके लिए रूटवार बसों की उपलब्धता, समय और यात्रियों की मांग की जांच जरूरी है। परमिट पर बसों के संचालन और निर्धारित रूट से हटकर चलने की शिकायतों की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। रूट नंबर-7 पर पहले से अधिक यातायात दबाव है, इसलिए यातायात पुलिस नए परमिट धारकों को इस रूट पर संचालन की अनुमति नहीं दे रही है। बाहरी कॉलोनियों में सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था जेसीटीएसएल के अधीन है। -चंपालाल, आरटीओ, जयपुर प्रथम