दिमाग और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारियों की पहचान और इलाज AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से भी किया जाएगा। मिर्गी, पार्किंसन, डिमेंशिया और लकवे जैसी बीमारियों में एआई की मदद से दिमाग के प्रभावित हिस्से की अधिक सटीक पहचान करने के साथ ही उसका आकार और नुकसान का स्तर भी मापा जा सकेगा। जयपुर के सीतापुरा स्थित जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर (JECC) में आयोजित इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी (आईएएन) के 33वें राष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन आईएएनकॉन-2026 में देश-विदेश के एक्सपर्स ने चर्चा की। आयोजन के कोषाध्यक्ष डॉ. दीपक जैन ने बताया- सम्मेलन में एआई के चिकित्सा उपयोग पर विशेष सत्र आयोजित किए। मिर्गी के मरीजों की MRI जांच में एआई की मदद से मस्तिष्क के उस हिस्से की पहचान की जा सकती है, जहां बीमारी से संबंधित असामान्यता मौजूद है। प्रभावित हिस्से की साइज और आयतन भी अधिक सटीकता से मापा जा सकता है। इससे उन मरीजों में मिर्गी की सर्जरी की योजना बनाने में मदद मिलेगी, जिनमें दवाओं से दौरे नियंत्रित नहीं हो पाते। AI से जांच प्रभावी बनेगी- एक्सपर्ट्स इसी तरह पार्किंसन और डिमेंशिया के मरीजों में भी बीमारी से जुड़े बदलावों की पहचान और आकलन में एआई का उपयोग बढ़ रहा है। लकवे के मामलों में भी प्रभावित मस्तिष्क क्षेत्र का पता लगाने और आगे के उपचार की दिशा तय करने में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि एआई चिकित्सकों का विकल्प नहीं, बल्कि उनकी जांच और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने वाला साधन है। लक्षण दिखने पर न्यूरोलॉजिस्ट से कंसल्ट करना जरुरी जयपुर के अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आर.के सुरेखा और प्रवक्ता डॉ. त्रिलोचन श्रीवास्तव ने मिर्गी के विभिन्न प्रकारों और समय पर इलाज की आवश्यकता पर जानकारी दी। उन्होंने बताया - मिर्गी का दौरा पड़ने पर मरीज के मुंह से झाग निकलना, हाथ-पैरों में अकड़न, झटके आना, जीभ कटना और बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में दौरे के दौरान अजीब गंध महसूस होना, असामान्य आवाज सुनाई देना या कुछ समय के लिए काम करते-करते अचानक रुक जाना भी इसके लक्षण हो सकते हैं। कई बार लोग इन लक्षणों को ऊपरी प्रभाव या अंधविश्वास से जोड़ देते हैं, जबकि यह मस्तिष्क से संबंधित बीमारी हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर न्यूरोलॉजिस्ट से कंसेल्ट करना जरुरी है। 5 मिनट से अधिक दौरा चलने पर हॉस्पिटल जाएं-डॉक्टर आयोजन कोषाध्यक्ष डॉ. पुष्कर गुप्ता ने बताया- बेहोशी या कुछ समय के लिए असामान्य व्यवहार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। न्यूरोलॉजिस्ट जांच के जरिए मिर्गी के दौरे, लॉ ब्लड प्रेशर और हार्ट संबंधी समस्या और माइग्रेन के बीच अंतर स्पष्ट कर सकते हैं। पांच मिनट से अधिक दौरा चलने पर मरीज को तत्काल हॉस्पिटल पहुंचाना चाहिए।