पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 का इनॉगरेशन किया। उन्होंने कहा कि इस साल दुनिया में एनर्जी शॉक की ही चर्चा हो रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ सालों में ग्लोबल इकोनॉमी ने ऐसे संकटों का सामना किया है, जो पहले कभी नहीं हुए। उन्होंने कहा कि कोविड-19 से लेकर पश्चिम एशिया के संकट तक दुनिया को एक के बाद एक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मुझे गर्व है कि 140 करोड़ भारतीयों ने देश को इन मुश्किल समय से निकलने में मदद की है। कई चुनौतियों के बावजूद भारत ने एक मजबूत ग्रोथ ट्रैक बनाए रखा। अगर हमने पिछले दशक में क्लीन एनर्जी में इन्वेस्ट नहीं किया होता और नए सिस्टम नहीं बनाए होते तो हमारी इकोनॉमी पर इन संकटों का असर कहीं ज्यादा गंभीर होता। पीएम मोदी के भाषण की 5 बड़ी बातें... भारत की रिन्यूबल एनर्जी क्षमता कितनी है, आगे क्या चुनौतियां; 5 सवाल-जवाब सवाल: रिन्यूएबल एनर्जी क्या होती है? जवाब: ऐसे ऊर्जा स्रोत, जिनसे बार-बार बिजली बनाई जा सकती है और जो प्राकृतिक रूप से दोबारा उपलब्ध होते हैं, उन्हें रिन्यूएबल एनर्जी कहते हैं। जैसे: - सूरज की रोशनी से सोलर एनर्जी। - हवा से विंड एनर्जी। - पानी से हाइड्रो पावर। - जैविक कचरे और कृषि अवशेषों से बायो एनर्जी। सवाल: भारत के लिए यह समिट क्यों अहम है? सवाल: भारत की रिन्यूबल एनर्जी क्षमता कितनी है? जवाब: भारत में रिन्यूएबल एनर्जी (सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय स्रोतों) की कुल स्थापित क्षमता करीब 299.25 गीगावॉट (GW) है। इसमें सोलर एनर्जी की क्षमता 171.05 GW, विंड एनर्जी की 59.20 GW और बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट की 52.06 GW है। देश में रोजाना सोलर, विंड और अन्य रिन्यूएबल स्रोतों से औसतन करीब 85.57 करोड़ यूनिट बिजली पैदा हो रही है। सवाल: क्या 300.50 GW का मतलब है कि भारत रोज इतनी बिजली बना रहा है? जवाब: नहीं। इसका मतलब है कि इन सभी बिजली संयंत्रों की कुल स्थापित उत्पादन क्षमता 300.50 GW है। इसे ऐसे समझिए: जैसे किसी कार की अधिकतम रफ्तार 200 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसका मतलब यह नहीं कि कार हर समय 200 की रफ्तार से चल रही है। इसी तरह बिजली संयंत्र भी हर समय अपनी पूरी क्षमता से बिजली नहीं बनाते। सवाल: क्या 300.50 GW बिजली भारत के लिए पर्याप्त है? जवाब: अभी इसे देश की पूरी बिजली जरूरत के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता। भारत में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। घरों में AC, फैक्ट्रियों, मेट्रो, इलेक्ट्रिक वाहनों और डेटा सेंटर को ज्यादा बिजली चाहिए। इसके अलावा सोलर और विंड एनर्जी हर समय उपलब्ध नहीं होती। इसलिए भारत को कोयला, गैस और दूसरे स्रोतों से भी बिजली बनानी पड़ती है। सवाल: रिन्यूएबल एनर्जी बढ़ने से आम लोगों को क्या फायदा होगा? जवाब: घरों में सोलर पैनल लगाने से बिजली बिल कम हो सकता है। किसानों को सोलर पंप से सिंचाई में मदद मिल सकती है। नए सोलर और विंड प्रोजेक्ट से रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। बिजली उत्पादन के लिए कोयले पर निर्भरता घट सकती है। प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, बिजली बिल में कितनी बचत होगी, यह योजना, लागत और इस्तेमाल पर निर्भर करेगा।