युद्ध के दौरान अगर रास्ते में नदी आ जाए, रेत के ऊंचे टीले हों या हेलिकॉप्टर उतारने के लिए जगह न मिले, तब भी सेना की आगे बढ़ने की रफ्तार नहीं रुकनी चाहिए। ऐसी ही मुश्किलों से निपटने के लिए भारतीय सेना की सदर्न कमांड के स्ट्राइक सैपर्स ने खास फील्ड ट्रेनिंग में अपनी इंजीनियरिंग क्षमता दिखाई। इस ट्रेनिंग का मकसद युद्ध के दौरान सैनिकों और सैन्य वाहनों के आने-जाने का रास्ता आसान बनाना है। इसमें सिर्फ 10 मिनट में पानी पर अस्थायी पुल बनाने, रेगिस्तान में रेत हटाकर सैन्य वाहनों के लिए रास्ता तैयार करने और मुश्किल जगहों पर तुरंत हेलिपैड बनाने की ट्रेनिंग दी गई। सेना के इन इंजीनियर सैनिकों का काम सिर्फ रास्ते बनाना नहीं है, बल्कि मुश्किल हालात में भी सेना के मिशन को बिना रुके आगे बढ़ाना है। रेत के टीलों को हटाकर बनाएंगे सैन्य रास्ते थार के रेगिस्तान में टैंक, बख्तरबंद गाड़ियों और भारी सैन्य ट्रकों को ले जाने में रेत के कारण मुश्किल होती है और उनकी रफ्तार कम हो जाती है। ट्रेनिंग के दौरान स्ट्राइक सैपर्स बुलडोजर और बड़ी मशीनों की मदद से रेत हटाकर रास्ते बनाते नजर आ रहे हैं। इसके अलावा मशीनों से नए रास्ते तैयार करने और जमीन को गाड़ियों के चलने लायक बनाने का प्रदर्शन भी किया गया। इस ट्रेनिंग से युद्ध के दौरान सेना के जवानों और सैन्य वाहनों को आगे बढ़ने के लिए दूसरे रास्ते मिल सकेंगे। पानी के बीच 10 मिनट में पुल तैयार करने की क्षमता युद्ध के दौरान नदी, नहर या पानी से भरे इलाके को भी पार करना सेना के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में सैपर्स अस्थायी पुल बनाकर सेना के लिए रास्ता तैयार करते हैं। ट्रेनिंग में पानी के ऊपर मॉड्यूलर ब्रिज सिस्टम की मदद से पुल बनाया जाता दिखाई दे रहा है। इस पुल के अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर रास्ता तैयार किया जाता है, ताकि सैनिक और सैन्य वाहन आसानी से पानी के दूसरी तरफ पहुंच सकें। इस अभ्यास में करीब 10 मिनट में पुल तैयार करने की क्षमता पर जोर दिया गया। हालांकि, ट्रेनिंग में इसकी समय सीमा की अलग से पुष्टि नहीं होती। ऊबड़-खाबड़ जगह पर तुरंत तैयार होगा हेलिपैड युद्ध के दौरान हर जगह हेलिपैड या हवाई पट्टी नहीं होती। ऐसे में सैपर्स जरूरत के हिसाब से अस्थायी हेलिपैड तैयार करते हैं। इसके लिए रेतीली और ऊबड़-खाबड़ जमीन को समतल कर हेलिकॉप्टर के उतरने लायक जगह बनाई जाती है। इससे जरूरत पड़ने पर सैनिकों, हथियारों और जरूरी सैन्य सामान को हेलिकॉप्टर से पहुंचाया जा सकता है। युद्ध में सैपर्स क्यों हैं जरूरी? सैपर्स सेना के कॉम्बैट इंजीनियर होते हैं। इनका काम दुश्मन की ओर से बनाई गई रुकावटों को पार करना, रास्ते बनाना, पुल तैयार करना और सेना के जवानों को आगे बढ़ने में मदद करना है। आज के युद्ध में इनकी भूमिका और भी जरूरी हो गई है। सदर्न कमांड की इस ट्रेनिंग में सैनिकों की तकनीकी जानकारी, टीम के साथ काम करने और कम समय में मुश्किलों का हल निकालने की क्षमता को परखा गया। इसका मकसद मुश्किल से मुश्किल हालात में भी सेना के जवानों और सैन्य वाहनों की आवाजाही जारी रखना है।