भास्कर न्यूज | टोंक हाईकोर्ट ने उनियारा तहसील में सार्वजनिक भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले में दायर जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को सार्वजनिक भूमि संरक्षण प्रकोष्ठ (पीएलपीसी) अथवा सक्षम अधिकारी के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करने की छूट दी है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को शिकायत पर दो महीने के भीतर नियमानुसार निर्णय करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 30 अक्टूबर 2026 को उनियारा निवासी नेमीचंद मीणा की ओर से दायर जनहित याचिका पर यह आदेश दिया। याचिका में राज्य सरकार, कलेक्टर टोंक, उपखंड अधिकारी, तहसीलदार, नगरपालिका उनियारा सहित अन्य को पक्षकार बनाया गया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अक्षय यादव ने कोर्ट को 30 जनवरी 2019 को जगदीश प्रसाद मीणा व अन्य बनाम राजस्थान राज्य व अन्य मामले में पारित आदेश की जानकारी दी। इस आदेश में हर जिले में सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में सार्वजनिक भूमि संरक्षण प्रकोष्ठ गठित करने के निर्देश दिए गए थे। इस व्यवस्था के तहत चरागाह, जोहड़, तालाब, नदी, नदी पेटा, सार्वजनिक रास्ते, श्मशान, कब्रिस्तान जैसी भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतों की जांच संबंधित उपखंड अधिकारी, तहसीलदार अथवा नायब तहसीलदार के माध्यम से करवाई जानी है। अतिक्रमण प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। याचिकाकर्ता ने इसी व्यवस्था के तहत शिकायत प्रस्तुत करने और उस पर समयबद्ध निर्णय की मांग की थी। खंडपीठ ने जगदीश प्रसाद मीणा प्रकरण में पूर्व में जारी आदेश के अनुरूप याचिका का निस्तारण करते हुए प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से दो महीने में निर्णय करने के निर्देश दिए।