ईरान में परमाणु बम बनाने की मांग हो रही है। देश की मस्जिदों में शुक्रवार की नमाज के दौरान इमाम और कट्टरपंथी नेता खुले तौर पर कह रहे हैं कि अमेरिका और इजराइल से सुरक्षा के लिए परमाणु हथियार बनने चाहिए। यह मांग ऐसे समय में उठ रही है, जब ईरान के नेता अमेरिका और इजराइल के साथ जारी जंग को खत्म करने की कोशिशें कर रहें हैं। देश के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई ने फतवा जारी कर परमाणु बम बनाने और इस्तेमाल करने पर बैन लगाया था। अब इसके खिलाफ आवाज उठने लगी है। शुक्रवार की नमाज में लग रहे परमाणु बम के लिए नारे पिछले हफ्ते ईरान के पश्चिमी शहर कुहदाश्त में शुक्रवार की नमाज के दौरान इमाम ने कहा था कि हमें परमाणु हथियारों से लैस होना चाहिए, ताकि हम अपराधी अमेरिका का मजबूती से मुकाबला कर सकें। उनके इस बयान के बाद नमाजियों ने नारा लगाया- परमाणु हथियारों से बचाव करना हमारा हक है। तेहरान में भी शुक्रवार की नमाज के दौरान इमाम अकबरी ने परमाणु नीति बदलने को देश की जरूरत बताया। इस पर भी लोगों ने वही नारा लगाया। अमेरिका-इजराइल के हमलों के बाद लोगों की सोच बदली अली खामेनेई चाहते थे कि ईरान परमाणु बम न बनाए लेकिन इतना सक्षम जरूर दिखे कि अमेरिका और इजराइल उस पर हमला करने से डरें। उन्हें लगता था कि ईरान की परमाणु ताकत को लेकर बना डर ही दुश्मन देशों को हमला करने से रोक देगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ जंग शुरू कर दी। इस साल अमेरिका के हमले में अली खामेनेई की भी मौत हो गई। ईरान के जानकार मोहम्मद अली शबानी के मुताबिक, इन हमलों के बाद ईरान में लोगों की सोच बदल रही है। अब उन्हें लगने लगा है कि अगर देश के पास परमाणु बम होता, तो अमेरिका और इजराइल हमला करने से पहले कई बार सोचते। यानी परमाणु बम न बनाने के बावजूद ईरान को हमले झेलने पड़े। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के एक बयान से भी इस सोच को बल मिला। उन्होंने सितंबर में कहा था कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होते, तो वे उसके सुप्रीम लीडर को फोन करके उनका हाल पूछते और मदद की पेशकश करते। लेकिन परमाणु हथियार न होने की वजह से अमेरिका ने उन पर बमबारी की। परमाणु समझौते से बाहर निकलने की मांग भी बढ़ी ईरान में परमाणु हथियारों पर रोक लगाने वाली अंतरराष्ट्रीय संधि (NPT) से बाहर निकलने की मांग भी बढ़ रही है। इस संधि के तहत ईरान ने परमाणु बम नहीं बनाने का वादा किया है। ईरान के विदेश मामलों के जानकार मोहम्मद गदरी के मुताबिक, पहले सरकार में कुछ ही लोग संधि से बाहर निकलने की बात करते थे। लेकिन अब ज्यादा नेता इसके पक्ष में आ रहे हैं। ईरान के सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेजाई ने भी सरकारी टीवी पर कहा था कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा कर रही है। हालांकि, अभी कोई फैसला नहीं हुआ। यह साफ नहीं है कि इस बहस पर नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की क्या राय है। हालांकि राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी अब भी चाहते हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम सिर्फ शांतिपूर्ण कामों के लिए हो। ईरान का परमाणु कार्यक्रम हमेशा विवादों में रहा है ईरान की सरकार हमेशा कहती रही है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। हालांकि, पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियां पहले कई बार दावा कर चुकी हैं कि ईरान परमाणु बम बनाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका और इजराइल के कुछ अधिकारियों ने ईरान पर परमाणु बम बनाने की तैयारी करने का आरोप भी लगाया था। साल 2015 में ईरान और अमेरिका समेत दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच परमाणु समझौता हुआ था। इसके तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कई पाबंदियां लगाई गई थीं। हालांकि, 2018 में राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिका को इस समझौते से बाहर कर लिया। अमेरिका पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है ईरान के जानकार ओमिद मेमरियन के मुताबिक, परमाणु बम बनाने की मांग उठाकर ईरान अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है। इस समय कतर की मदद से दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। उनका कहना है कि ईरान अमेरिका को यह संकेत देना चाहता है कि अगर बातचीत से कोई हल नहीं निकला, तो वह अपनी परमाणु नीति बदल सकता है। ऐसा होने पर अमेरिका के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ईरान के जानकार मोहम्मद अली शबानी के मुताबिक, अब मस्जिदों में भी लोग अली खामेनेई के उस फतवे के खिलाफ बोल रहे हैं, जिसमें परमाणु बम बनाने पर रोक लगाई गई थी। उनके मुताबिक, अब इस रोक का विरोध खुलकर होने लगा है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि ईरान की सरकार भी अपनी परमाणु नीति बदलेगी या नहीं। -------------------------- यह खबर भी पढ़ें… चीन मशीनों-तकनीक की सप्लाई रोककर दुनिया पर दबाव बना रहा: भारत को सुरंग मशीनें मिलने में अड़ंगा, अमेरिका की AI-चिप इंडस्ट्री पर भी असर दुनिया में कुछ मशीनें इतनी बड़ी होती हैं कि उनकी लंबाई फुटबॉल मैदान के बराबर होती है। इनका इस्तेमाल पहाड़ों में सुरंग बनाने के लिए किया जाता है। पूरी खबर पढ़ें…