प्रेरणा साहनी, पूजा शर्मा, बकुल महेश माथुर, ईशा सिंह की रिपोर्ट महापौर सुनील कोठारी ने काम संभाल लिया है। शहर को बेहतर बनाने का जिम्मा उन पर है। कुछ काम बहुत जरूरी मगर नजरअंदाज हैं। जैसे-खुले पेशाबघर। शहर की मान-मर्यादा, स्वच्छता-स्वास्थ्य और साख के दृष्टिकोण से इन्हें बंद करना जरूरी है। कवर्ड यूरिनल बनाने होंगे। भास्कर की 4 महिला रिपोर्टर्स ने महिलाओं की शर्म, पीड़ा परेशानी को देखा-समझा सहा भी। जौहरी बाजार, चौड़ा रास्ता, किशनपोल, अजमेरी गेट, जलेब चौक, हवामहल बाजार और आमेर सहित हर वो जगह जहां महिलाओं और पर्यटकों की चहल-पहल है, वहां खुले पेशाबघर बेशर्मी दिखाते हैं। गंदगी-सड़ांध रहती है। वर्ल्ड हेरिटेज की साख पर दाग लगता है। 50 लाख आबादी वाले जयपुर में सिर्फ 220 सुलभ कॉम्प्लैक्स हैं। अधिक फुटफॉल वाले बाजारों में ये ढूंढ़ने से भी नहीं मिलते। ओपन यूरिनल हैं, जो अभद्र व गंदे हैं। महिला टॉयलेट्स तो दिखते ही नहीं। पब्लिक टॉयलेट्स के रखरखाव पर ध्यान देना जरूरी है।