राजस्थान की लोक संस्कृति और पारंपरिक नृत्यों की पहचान अब ब्रिटेन के ऐतिहासिक किलों तक पहुंच रही है। ब्रिटेन के डॉर्सेट स्थित करीब 1000 साल पुराने कॉर्फ कैसल में पहली बार दिवाली का भव्य उत्सव आयोजित किया गया। 25 अक्टूबर को हुए इस आयोजन में 1100 से अधिक लोग शामिल हुए। खास बात यह रही कि जयपुर मूल की लोक कलाकार गरिमा कछावा और उनके समूह ‘रजवाड़ी रूट्स’ ने राजस्थानी लोक संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों से समारोह में भारतीय संस्कृति के रंग बिखेरे। तेरह ताली, ‘पधारो म्हारे देस’, घूमर और कालबेलिया की प्रस्तुतियों ने विदेशी दर्शकों को राजस्थान की समृद्ध लोक परंपराओं से रूबरू कराया। बोर्नमथ, पूल और क्राइस्टचर्च (बीपीसी) इंडियन कम्युनिटी ने नेशनल ट्रस्ट के सहयोग से इस दिवाली समारोह का आयोजन किया। ऐतिहासिक कॉर्फ कैसल की प्राचीन दीवारों के बीच भारतीय संगीत, नृत्य, खान-पान और पारिवारिक गतिविधियों का आयोजन हुआ। इस दौरान भारतीय समुदाय के लोगों के साथ अलग-अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से आए दर्शकों ने भी उत्सव में भाग लिया। शाम ढलने के साथ दीप प्रज्वलन ने किले के परिसर को रोशनी और दिवाली के उल्लास से भर दिया। रामापीर की आराधना से शुरू हुई राजस्थानी प्रस्तुतियां समारोह के सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत गरिमा कछावा के समूह ‘रजवाड़ी रूट्स’ ने राजस्थान की लोक परंपराओं को समर्पित प्रस्तुतियों से की। समूह में गरिमा के साथ नीरजा गोयल, मलारकोडी नागरत्नम और हेब्सी सथियानाथन शामिल थीं। कलाकारों ने सबसे पहले राजस्थान के लोकदेवता रामापीर को समर्पित भक्तिपरक लोकनृत्य तेरह ताली की प्रस्तुति दी। मंजीरों की लय और पारंपरिक अंदाज में की गई इस प्रस्तुति ने दर्शकों को राजस्थान की लोक आस्था से परिचित कराया। इसके बाद ‘पधारो म्हारे देस’ की प्रस्तुति के जरिए राजस्थान की मेहमाननवाजी और सांस्कृतिक पहचान को मंच पर उतारा गया। घूमर की गोलाकार गतियों और पारंपरिक वेशभूषा ने राजस्थानी लोकनृत्य की खूबसूरती दिखाई, वहीं कालबेलिया की तेज लय और ऊर्जावान मुद्राओं ने माहौल में अलग ही रंग भर दिया। कार्यक्रम का समापन लोकप्रिय राजस्थानी लोकगीत ‘चौधरी’ पर आधारित प्रस्तुति से हुआ। इस तरह समूह ने भक्ति, लोकगीत और नृत्य के जरिए राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत के कई रंग एक ही मंच पर पेश किए। राजस्थानी लोक संगीत की लय और नृत्य की ऊर्जा का असर दर्शकों पर भी दिखाई दिया। अलग-अलग उम्र और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोग गीतों के साथ गुनगुनाते और कलाकारों का उत्साह बढ़ाते नजर आए। कई दर्शक संगीत की धुन पर झूमते दिखाई दिए। कॉर्फ कैसल की ऊंचाई पर अक्टूबर की ठंड के बावजूद समारोह में लोगों का उत्साह बना रहा। इस आयोजन में लोक कलाओं ने भाषा और देश की सीमाओं से परे लोगों को जोड़ने का काम किया। राजस्थानी गीतों और नृत्यों के माध्यम से ब्रिटेन में मौजूद दर्शकों को राजस्थान की परंपराओं, संगीत और लोकजीवन की झलक देखने को मिली। दिवाली समारोह में क्षेत्र के तीन स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। इनमें बोर्नमथ के मेयर काउंसलर रॉबर्टो रोक्का, पूल की मेयर काउंसलर ट्रेसी न्यूमैन और वेयरहम के मेयर काउंसलर कीथ क्रिचली शामिल रहे। उन्होंने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया और समारोह में सहभागिता की। कार्यक्रम में अन्य कलाकारों और समूहों ने भी भारतीय संस्कृति की विविधता को दर्शाने वाली प्रस्तुतियां दीं। इसके अलावा आगंतुकों के लिए भारतीय व्यंजनों, सामुदायिक स्टॉलों और बच्चों तथा परिवारों के लिए कई गतिविधियों का आयोजन किया गया। शाम को दीप प्रज्वलन के साथ उत्सव का माहौल और खास हो गया। जयपुर से जुड़ी गरिमा कछावा के लिए ब्रिटेन में राजस्थान की लोक परंपराओं को प्रस्तुत करना अपनी सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर रहा। उनके समूह ‘रजवाड़ी रूट्स’ का उद्देश्य राजस्थानी लोक संगीत और नृत्य को उसकी पारंपरिक पहचान के साथ अलग-अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों के लोगों तक पहुंचाना है। समूह के कलाकारों ने इस आयोजन के लिए आमंत्रित करने और व्यवस्थाएं करने के लिए बीपीसी इंडियन कम्युनिटी और नेशनल ट्रस्ट का आभार जताया। ते हैं।