जयपुर में विशेषज्ञों ने कहा- AI तकनीक के उपयोग के बीमारी में अपने फायदे और नुकसान होते हैं। आमजन को समझना होगा कि AI से जानकारी लेकर खुद इलाज या बीमारी का निदान करना उचित नहीं है। जयपुर में सीतापुरा स्थित जेईसीसी में इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी (IAN) के 33वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन IANCON-2026 का रविवार को समापन हुआ। इस मौके पर आयोजन अध्यक्ष डॉ. दिनेश शर्मा ने यह कहा। सेशन में जीन थैरेपी से आनुवंशिक बीमारियों के आधुनिक इलाज पर भी चर्चा हुई। इसमें विशेषज्ञों ने बताया- जीन थैरेपी के जरिए बीमारी के मूल आनुवंशिक कारण का पता चलाकर उस बीमारी को ठीक करने की दिशा में बहुत रिसर्च चल रहे हैं, जिसमें हम काफी हद तक आगे बढ़ चुके हैं। उन्होंने बताया- स्टेम सेल ट्रांसप्लांट और लिवर ट्रांसप्लांट से भी कई आनुवंशिक बीमारियों के इलाज अब हो रहे है। विदेश से भी शामिल हुए न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ 5 दिन की कॉन्फ्रेंस में आयोजक चेयरमैन डॉ. दिनेश शर्मा और आयोजक सचिव डॉ. भावना शर्मा ने बताया- सम्मेलन में 3100 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था और शामिल हुए। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशों से भी न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ, मेडिकल सेक्टर के शोधकर्ता जयपुर पहुंचे। उन्होंने बताया- इन पांच दिनों में 160 से ज्यादा सेशन आयोजित किए गए, जिसमें देश-विदेश के सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट ने अनुभव और शोध साझा किए। इस मौके पर इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मी नरसिम्हा, डॉ. अनुपम दास गुप्ता और डॉ. कैलाश भाटिया के भी सेशन आयोजित किए गए। सम्मेलन के समापन अवसर पर डॉ. पुष्कर गुप्ता, डॉ. नीतू रामरखियानी, डॉ. त्रिलोचन श्रीवास्तव, डॉ. सुरेश गुप्ता, डॉ. आरके सुरेखा, डॉ. सुनीत शाह, डॉ. शाकिर हुसैन, डॉ. दीपक जैन सहित आयोजन समिति के सदस्य मौजूद रहे। मेडिकल साइंस में बीमारी के इलाज की खोज के लिए कई बार रिसर्च करनी पड़ती समापन मौके पर आयोजन अध्यक्ष डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा- मेडिकल साइंस में किसी बीमारी के इलाज की खोज के लिए कई बार तक रिसर्च करनी पड़ती है। किसी नई बीमारी या इलाज पद्धति पर पर्याप्त शोध और वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध होने के बाद ही उसका उपयोग किया जाना चाहिए। AI के पास उपलब्ध आंकड़ों की सीमा होती है। यदि कोई नई बीमारी का उसके डेटा में मौजूद नहीं है तो वह उसके बारे में विश्वसनीय जानकारी देने में सक्षम नहीं होगा। डॉक्टरों को मिली आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग सम्मेलन में आयोजित कार्यशाला में न्यूरोलॉजी की नई तकनीकों, इलाज का प्रेक्टिकल करके नए डॉक्टरों को ट्रेनिंग दी गई। इसमें ब्रेन स्टिमुलेशन तकनीक का उपयोग, विभिन्न बीमारियों में इसकी उपयोगिता और इलाज की प्रक्रिया समझाई। मांसपेशियों की अकड़न जैसी समस्याओं में बोटुलिनम टॉक्सिन इंजेक्शन किस प्रकार और किन परिस्थितियों में दिया जाना चाहिए, इसकी ट्रेनिंग भी दी गई। ब्रिटेन से आए डॉ. जलेश पनीकर ने मूत्राशय से संबंधित बीमारियों की पहचान और इलाज की आधुनिक पद्धतियों पर प्रशिक्षण दिया। अहमदाबाद के डॉ. अरविंद शर्मा ने न्यूरोसोनोलॉजी यानी नसों, मांसपेशियों और रक्त वाहिकाओं की जांच से जुड़ी तकनीकों की जानकारी दी।