राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर स्थित 'विद्याधर का बाग' में शादी-समारोह, पार्टियों और हर तरह की व्यवसायिक गतिविधियों पर रोक लगा दी हैं। यह रोक मुख्य न्यायाधीश संजय के अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की बैंच ने सिटिजन्स प्रोटेक्शन सोसायटी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए लगाई। साथ ही कोर्ट ने वन विभाग से पूछा कि उन्होने रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में स्थित इस बाग में किस आधार पर रेस्टोरेंट संचालन की अनुमति दी। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि यह वन्यजीवों का इलाका है तो यहां व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देने के लिए टेंडर किस आधार पर जारी किया गया ? कोर्ट ने माना कि यहां देर रात तक तेज म्यूजिक, लेजर लाइट और आतिशबाजी से संरक्षित वन्यजीवों को परेशानी होती है। ऐसे में इस तरह की गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती। अब मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होगी। पैरवी के लिए कोई मौजूद नहीं, फिर भी कोर्ट ने सुना मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करने के लिए कोई उपस्थित नहीं हुआ। इसके बावजूद अदालत ने जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार किया। याचिका में बताया गया कि विद्याधर का बाग एक घोषित स्मारक है और आरक्षित वन क्षेत्र में स्थित है। इसके बावजूद यहां शादियां और निजी समारोह आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों में देर रात तक तेज आवाज में म्यूजिक बजाया जाता है। लेजर लाइट और आतिशबाजी का इस्तेमाल भी होता है। याचिका में यह भी बताया गया कि 14 सितंबर 2022 को जारी टेंडर के आधार पर इस बाग में रेस्टोरेंट का संचालन किया जा रहा था। याचिकाकर्ता ने इन गतिविधियों को वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक बताते हुए इन पर रोक लगाने की मांग की थी। सरकार ने कहा-टेंडर खत्म,अभी कोई गतिविधि नहीं
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता माही यादव ने कोर्ट को बताया कि बाग में फिलहाल न तो शादी-समारोह आयोजित किए जा रहे हैं और न ही किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। सरकार के अनुसार 14 सितंबर 2022 को जारी टेंडर की अवधि समाप्त हो चुकी है। वन विभाग के अधिकारियों ने भी सरकार के इस पक्ष का समर्थन किया। सरकार की ओर से दी गई इन दलीलों और टेंडर की अवधि समाप्त होने के तथ्य को देखते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित इलाके में ऐसी सभी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने साफ किया कि अब इस क्षेत्र में पार्टियों, शादी-समारोह, रेस्टोरेंट या इसी तरह के किसी भी व्यावसायिक उपयोग की अनुमति नहीं होगी। कोर्ट कमिश्नर रिपोर्ट तैयार करेंगे
हाईकोर्ट ने एडवोकेट अपेक्षा बापना को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करते हुए विद्याधर का बाग परिसर का निरीक्षण करने, मौके की तस्वीरें लेने और वहां की वास्तविक स्थिति की पूरी जानकारी जुटाकर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस काम के लिए राज्य सरकार को उन्हें 25 हजार रुपए का भुगतान करना होगा। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान कोर्ट कमिश्नर को सभी जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी कहा है। कोर्ट कमिश्नर को भी अगली सुनवाई से पहले अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।