जालोर जिले की उम्मेदाबाद पंचायत समिति के आलासन गांव में सरपंच पद की काउंटिंग को लेकर विवाद हो गया। यहां प्रकाश कंवर पत्नी करण सिंह राजपूत और रकमा देवी पत्नी जोगसिंह के बीच मुकाबला था। पहली बार हुई काउंटिंग में प्रकाश कंवर आगे थीं। फिर रकमा देवी की ओर से तीन बार री-काउंटिंग करवाई गई। इसके बाद आए नतीजों में रकमा देवी को एक वोट के अंतर से विजेता घोषित कर दिया गया। मामले में प्रकाश कंवर के समर्थकों ने नतीजों में प्रशासन पर पक्षपात करने और एक पक्ष को जिताने का आरोप लगाया है। करण सिंह ने बताया कि चौथी बार मतगणना करवाने के लिए प्रकाश कंवर के एजेंट ने मांग रखी थी, लेकिन फिर दूसरे पक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। हालांकि, पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग कर स्थिति संभाल ली। करण सिंह दोबारा मतगणना की मांग को लेकर कलेक्टर ऑफिस के सामने धरना देने पैदल ही जालोर जाएंगे। मतगणना स्थल पर भारी भीड़, पुलिस तैनात इससे पहले मतगणना स्थल के बाहर दोनों प्रत्याशियों के समर्थकों की भारी भीड़ जमा हो गई। स्थिति को देखते हुए मतगणना स्थल पर सीओ गौतम जैन, बिशनगढ़ थानाधिकारी पुन्नालाल, थानाधिकारी मनोज कुमार सहित भारी पुलिस जाब्ता भी पहुंचा और कानून व्यवस्था कंट्रोल में बनाए रखी। देखिए- मतगणना स्थल के बाहर की फोटोज रात 8 बजे बाद शुरू हुई थी काउंटिंग सौपाराम ने बताया कि काउंटिंग के दौरान शुक्रवार की रात 8 बजे सभी प्रत्याशियों और एजेंटों को अंदर बुलाया गया। पहले वार्ड पंचों की मतगणना शुरू हुई। इसके बाद रात करीब 11 बजे सरपंच पद की मतगणना शुरू हुई। शुरुआती मतगणना में प्रकाश कंवर आगे चल रही थीं। रात करीब 4 बजे रिटर्निंग अधिकारी (आरओ) ने प्रकाश कंवर को 2 वोट से विजयी घोषित कर दिया। इसके बाद रकमा देवी की ओर से दोबारा मतगणना की मांग की गई। सुबह करीब 7 बजे जालोर नायब तहसीलदार की देखरेख में री-काउंटिंग कराई गई, जिसमें रकमा देवी को एक वोट से विजयी घोषित कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने भी दोबारा मतगणना की मांग की। फिर से मतगणना कराने पर भी रकमा देवी को एक वोट की बढ़त मिली। दो मतपत्र कम होने का लगाया आरोप बूथ एजेंट सौपाराम ने बताया कि उन्होंने आरओ से कुल मतदान के बारे में पूछा तो 3127 वोट पड़ने की जानकारी दी गई, जबकि मौके पर केवल 3125 मतपत्र ही मौजूद बताए गए। जब शेष दो मतपत्रों के बारे में जानकारी मांगी तो आरओ ने उन्हें टेंडर वोट बताया। एजेंट ने टेंडर वोट से संबंधित लिफाफा दिखाने की मांग की, लेकिन बार-बार कहने के बावजूद उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बिना सहमति हस्ताक्षर कराने का आरोप सौपाराम ने आरोप लगाया कि आरओ और अन्य लोगों ने उनकी सहमति के बिना एक लेटर पर जबरदस्ती हस्ताक्षर करवा दिए। उनसे कहा गया कि हस्ताक्षर किए बिना वे मतदान केंद्र से बाहर नहीं जा सकते। इसके बाद दबाव बनाकर हस्ताक्षर करवाए गए। मतदान केंद्र से बाहर निकलते समय अत्यधिक तनाव के कारण वे बेहोश हो गए, इसके बाद उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रात करीब 4 बजे एक जन प्रतिनिधि और कुछ नेता मतदान केंद्र के अंदर बूथ तक पहुंचे। वहां उन्होंने शांत रहने के लिए कई लालच दी और उन पर दबाव बनाया। एजेंट ने पूरी मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।