सोने-चांदी की खरीद-बिक्री में इस्तेमाल होने वाले तराजू की सटीकता को लेकर नियमों में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब सर्राफा कारोबारियों को कीमती धातुओं के वजन के लिए केवल क्लास-1 और क्लास-2 श्रेणी के इलेक्ट्रॉनिक कांटों का इस्तेमाल करना होगा। सामान्य या निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले कांटों से तौल करने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इस बदलाव का सीधा असर ज्वैलरी शोरूम से लेकर छोटी सर्राफा दुकानों तक पड़ेगा। राजस्थान विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियम-2011 में संशोधन के जरिए यह व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य कीमती धातुओं के कारोबार में वजन की सटीकता सुनिश्चित करना और ग्राहकों को मिलीग्राम स्तर पर होने वाले संभावित नुकसान से बचाना है। नई गाइडलाइन के बाद अब सर्राफा कारोबारियों को अपने प्रतिष्ठानों पर इस्तेमाल किए जा रहे इलेक्ट्रॉनिक कांटों की श्रेणी और निर्धारित मानकों की जांच करनी होगी। 10 से 100 मिलीग्राम तक की त्रुटि पर लगेगी रोक सर्राफा कारोबार में मिलीग्राम का अंतर भी महत्वपूर्ण होता है। पुराने या कम सटीकता वाले इलेक्ट्रॉनिक कांटों में निर्धारित माप के अनुरूप परिणाम नहीं मिलने की आशंका रहती है। खासकर सोने के आभूषणों की खरीद-बिक्री और पुराने सोने के मूल्यांकन में वजन का छोटा-सा अंतर भी रकम में बड़ा फर्क पैदा कर सकता है। नई व्यवस्था में 1 मिलीग्राम तक की माप संबंधी सटीकता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। इससे वजन को लेकर ग्राहक और दुकानदार के बीच विवाद की आशंका भी कम होगी। क्लास-1 और क्लास-2 श्रेणी के कांटों का होगा इस्तेमाल नई व्यवस्था में कांटों की श्रेणी के आधार पर उनकी माप क्षमता और सटीकता को महत्व दिया गया है। क्लास-1 और क्लास-2 उच्च परिशुद्धता वाली श्रेणियां हैं। इनका उपयोग उन परिस्थितियों में किया जाता है, जहां बहुत कम वजन का अंतर भी महत्वपूर्ण होता है। अब सर्राफा कारोबारियों को ऐसे ही निर्धारित मानकों वाले इलेक्ट्रॉनिक कांटों का इस्तेमाल करना होगा। केवल डिजिटल डिस्प्ले होना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि कांटे का निर्धारित श्रेणी में होना और उसका विधिक माप विज्ञान विभाग के नियमों के अनुरूप सत्यापित होना भी जरूरी होगा।