झुंझुनूं के छापोली गांव में सोमवार को सड़क बना रहे आठ मजदूरों की करंट लगने से मौत हो गई। ये सड़क वन विभाग की संरक्षित भूमि पर बिना अनुमति बन रही थी। आचार संहिता के बीच 3 टीमें युद्धस्तर पर काम कर रही थीं, ताकि चुनावों से पहले सड़क पूरी बन जाए। मामले में सबसे बड़ा सवाल है कि बिना अनुमति सड़क निर्माण किसने शुरू कराया? जवाब जानने के लिए भास्कर रिपोर्टर ने मृतकों के रिश्तेदारों और गांव वालों से बात की। एक मृतक के परिजनों का कहना था कि निर्माण में पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी का दबाव था। उन्होंने कहा था- अगर हम पंचायत समिति सदस्य की सीट यहां से जीत जाएंगे तो सड़क बन जाएगी, वरना नहीं। वहीं भास्कर से बातचीत में पूर्व एमएलए ने सारे आरोपों को गलत ठहराया। उन्होंने कहा- कांग्रेसियों ने गांव वालों को उकसाया है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 13 दिन पहले पूर्व विधायक से की थी निर्माण दोबारा शुरू कराने की मांग भास्कर पड़ताल में सामने आया कि करीब 13 दिन पहले गांव वालों ने शुभकरण चौधरी से मीटिंग में इस सड़क का निर्माण दाेबारा स्टार्ट कराने की मांग की थी। इसके बाद काम शुरू हुआ। मृतक ठेकेदार विष्णु के भाई बीरबल सिंह ने भी बताया था कि राजनीति के चलते ही उन पर इस एक महीने में पूरे होने वाले काम को 3 नवंबर की वोटिंग से पहले पूरा करने का दबाव था। यही वजह थी कि एक साथ तीन-तीन मशीन व टीम लगाकर इस कार्य को पूरा करवाया जा रहा था। उन्होंने जब बताया कि काम में 25 दिन लगेंगे तो तो काम किसी दूसरे ठेकेदार को देने की बात कही। बीरबल ने बताया कि घटना के वक्त वो खुद कदंब कुंड के पास सीसी सड़क डाल रहे थे। हादसे का पता चलने पर मौके पर पहुंचे, तब तक आठ मजदूर दम तोड़ चुके थे। पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी ने कहा- मुझे तो कोई जानकारी ही नहीं थी कि वहां कोई सड़क भी बन रही है। हालांकि कुछ दिनों पहले गांव वालों ने मुझे बुलाया था और वहां इस सड़क निर्माण को करवाने की बात कही थी। लेकिन तब भी मैंने उन्हें स्पष्ट बता दिया था कि ये फॉरेस्ट का मामला है, इसमें मैं कुछ मदद नहीं कर सकता हूं। आप जिसे चाहे वोट दे, लेकिन ये काम मैं नहीं करवा सकता हूं। चुनाव से पहले सड़क पूरी करने की जल्दबाजी इस पूरे मामले में सड़क निर्माण की टाइमिंग भी कई सवाल खड़े करती है। चुनाव से ठीक पहले इस रास्ते पर सीसी सड़क का निर्माण कराया जा रहा था। स्थानीय स्तर पर दावा है कि आचार संहिता के बीच ठेकेदार पर काम जल्द से जल्द पूरा करने का दबाव था। निर्माण कार्य तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटकर कराया जा रहा था। हर हिस्से में अलग-अलग लेबर टीम लगाई गई थी। झुंझुनूं एसपी कावेंद्र सागर के अनुसार, प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि सड़क निर्माण ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से चंदा जुटाकर कराया था। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण कार्य इतनी तेजी से क्यों कराया जा रहा था, इसकी विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। ग्रामीण सुभाष कुमावत ने बताया कि कदंब कुंड इस इलाके का बड़ा धार्मिक स्थान है। सड़क सही नहीं होने से बारिश में यहां आने वाले लोगों को परेशानी होती थी। यहां वन विभाग की चौकी भी है, लेकिन पिछले 2 महीनों से कोई स्टाफ यहां नहीं रहता है। इस तरह करंट की चपेट में आए मजदूर सड़क निर्माण के दौरान अचानक मिक्श्चर मशीन ढलान से लुढ़कने लगी। उसे पकड़ने के लिए सभी मजदूर और ठेकेदार दौड़े। उन्हें पता ही नहीं चला कि मशीन का हाइड्रोलिक जैक ऊपर से गुजर रही हाईवोल्टेज लाइन को टच हो गया और वो सभी करंट की चपेट में आ गए। हादसे में हालेड़ा मंडावरा निवासी हरिराम गुर्जर (30), मंगलचंद गुर्जर (22), कालूराम गुर्जर (29) और पवन गुर्जर (23), छापोली निवासी विष्णु सैनी (38), सुरेंद्र उर्फ सुरेश सैनी (30), मुकेश सैनी (27) और उदयपुरवाटी निवासी नितेश सैनी (32) की मौत हो गई। वहीं पांच अन्य मजदूर घायल हो गए, जिनका उदयपुरवाटी हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। ….. ये खबरें भी पढ़ें… 1. राजस्थान में करंट लगने से 8 मजदूरों की मौत:झुंझुनूं में सड़क बनाते समय मशीन हाईटेंशन लाइन की चपेट में आई; गांववालों का 7 घंटे बाद धरना खत्म 2. चंदा जुटाकर जिस सड़क को बना रहे थे, वहीं मौत:सड़क पर बिखरीं चप्पलें, जले कपड़े; ठेकेदार समेत 8 की सांसे थमीं