जोधपुर के सरदारपुरा स्थित एक प्लॉट के मालिकाना हक को लेकर विवाद चल रहा है। फर्जी पट्टा तैयार कर व्यापारी से 7.50 लाख रुपए हड़पने के मामले में भगत की कोठी थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी और नगर निगम के कनिष्ठ सहायक हरवंश कल्ला को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया है। इस फर्जीवाड़े में निगम के एक अन्य कर्मचारी सहित अन्य आरोपी भी शामिल है। जानकारी के अनुसार- नागोरी गेट निवासी परिवादी विजय गहलोत ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि मेरे मित्र दीपक फर्नांडीज के सरदारपुरा C-रोड स्थित मकान के वे पॉवर ऑफ अटॉर्नी धारक हैं। इस संपत्ति को लेकर पहले से ही फर्जी वसीयत और धोखाधड़ी का मामला उदयमंदिर थाने में दर्ज चल रहा था। इसी विवाद के बीच नगर निगम जोधपुर के कनिष्ठ सहायक हरबंस कल्ला और श्रीराम कल्ला परिवादी के संपर्क में आए। दोनों आरोपियों ने विजय गहलोत को झांसा दिया कि वे कस्टोडियन संपत्ति का विवाद सुलवाकर नगर निगम से पट्टा जारी करवा देंगे। इसके एवज में उन्होंने पट्टा और रसीदें दिलाने के नाम पर कुल 7 लाख 50 हजार रुपए ऐंठ लिए और 27 फरवरी 2026 को एक पट्टा थमा दिया। ऐसे खुला फर्जीवाड़े का राज परिवादी जब इस पट्टे का रजिस्ट्रेशन कराने पंजीयन कार्यालय पहुंचे, तो अधिकारियों ने उस पर डिस्पैच नंबर और तारीख न होने के साथ-साथ अधिकारियों के हस्ताक्षर संदिग्ध मिलने पर इसे फर्जी करार दे दिया। इसके बाद जब नगर निगम कार्यालय में इसकी पड़ताल कराई गई, तो पता चला कि यह दस्तावेज निगम द्वारा जारी ही नहीं किया गया है। रुपए मांगे तो एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी धोखाधड़ी का खुलासा होने पर जब व्यापारी ने आरोपियों से अपनी रकम वापस मांगी तो हरबंस कल्ला ने शुरुआत में कुछ नकदी लौटाई, लेकिन बाकी रकम देने से इनकार कर दिया। व्यापारी का आरोप है कि जब उन्होंने बार-बार अपनी मेहनत की कमाई वापस मांगी, तो आरोपियों ने धमकाया कि हमारे पास कोई रुपए नहीं है। दोबारा पैसे मांगने आए तो एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करवाकर जेल भिजवा देंगे। इसके बाद अन्य आरोपी नरेश सांखला, दीपक डिसूजा और निर्मित श्रृंगी भी राजीनामा करने का दबाव बनाते हुए ब्लैकमेल करने लगे। पीड़ित की थाने में सुनवाई न होने पर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। एसीजेएम कोर्ट के आदेश पर भगत की कोठी थाना पुलिस ने नगर निगम के दो कर्मचारियों सहित 6 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। मामले की जांच एएसआई दिनेश विश्नोई कर रहे हैं। पुलिस अब पूरे सिंडिकेट और फर्जी पट्टे पर फर्जी हस्ताक्षर करने वाले अन्य आरोपियों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।