राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर के रावटी मंडोर इलाके में खसरा नंबर 1480 और 1480/3 पर बने अवैध निर्माण तीन महीने में हटाने के निर्देश दिए हैं। कार्रवाई की निगरानी जिला न्यायाधीश करेंगे और अनुपालना रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करेंगे। कोर्ट ने कहा कि जमीन निजी खातेदारी की होने का दावा करने भर से मनमाने निर्माण की छूट नहीं मिलती। सक्षम अधिकारी से भू-उपयोग बदलने और निर्माण की मंजूरी नहीं ली गई हो तो निर्माण अवैध माना जाएगा। न्यायाधीश मुन्‍नूरी लक्ष्मण और न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने महेंद्र पाल सिंह की जनहित याचिका पर यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता के वकील मोती सिंह राजपुरोहित के मुताबिक, याचिका में मंडोर प्रथम गांव की कुल 11.07 बीघा जमीन को उसके मूल रूप में बहाल करने और अतिक्रमण व अवैध निर्माण हटाने की मांग की गई थी। राजस्व रिकॉर्ड में जमीन गैर मुमकिन नदी याचिका में कहा गया कि राजस्व रिकॉर्ड में जमीन गैर मुमकिन नदी के रूप में दर्ज है। पहाड़ी इलाके से बारिश का पानी प्राकृतिक रूप से यहां पहुंचता है। तालाब भरने के बाद अतिरिक्त पानी पंचकुंड जलाशयों की ओर जाता है। याचिका में कहा गया कि निर्माण से प्राकृतिक जल निकासी और सार्वजनिक उपयोग पर असर पड़ने की आशंका है। सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के मुताबिक, 8.7 बीघा जमीन में करीब दो बीघा हिस्सा प्राकृतिक जल निकासी वाला निचला इलाका है। बाकी जमीन पहाड़ी और समतल है। निजी पक्ष ने जमीन पर खातेदारी अधिकार और पुराने राजस्व रिकॉर्ड का हवाला दिया। अदालत ने पाया कि जमीन की प्रकृति और खातेदारी अधिकारों को लेकर विवादित तथ्य हैं।