जोधपुर शहर के विवेक विहार थाने में मोबाइल टावर डिस्मेंटल करने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। एसआर रोडलाइंस के ट्रांसपोर्टर ने जियो कंपनी के वेयरहाउस में टावर जमा करवाने के बजाय फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर कंपनी और फर्म को चूना लगा दिया। पुलिस ने परिवादी की शिकायत पर बीएनएस (BNS) की अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जयपुर के हरमाड़ा निवासी दिनेश शर्मा ने थाने में दी रिपोर्ट में बताया कि नरसिंग मोबाइल कम्युनिकेशन नाम से उनकी एक फर्म जियो कंपनी से अधिकृत है। साल 2008 से टावर लगाने व हटाने (डिस्मेंटलिंग) का काम करती है। पहले खेत में रखवाया था सामान 11 अगस्त 2026 को जियो कंपनी की ओर से बालोतरा स्थित टॉवर को डिस्मेंटल कर मोगड़ा कलां स्थित जियो वेयरहाउस में जमा करवाने का मेल मिला था। इस पर ट्रांसपोर्टर श्रवण कुमार ने अपने वाहन के जरिए टावर सामग्री उठाई लेकिन हेड ऑफिस से आवश्यक कॉपियां जिसमें MDR, E-Way Bill, OGP प्राप्त नहीं होने के चलते उस दिन सामान वेयरहाउस में जमा नहीं हो सका। इसके बाद आपसी सहमति से विश्वास करते हुए वह टावर सामग्री ट्रांसपोर्टर श्रवण के घर के बाहर खेत में रखवा दी गई थी। मामले को लेकर 23 अक्टूबर को जब फर्म के अधिकृत कर्मचारी रजत चौधरी ने ट्रांसपोर्टर श्रवण से संपर्क किया, तो उसने वाहन की व्यवस्था होने की बात कही। कुछ देर बाद श्रवण ने वेयरहाउस के गेट के बाहर ही कर्मचारी रजत को दस्तावेज और रसीदें सौंप दीं और दावा किया कि उसने टावर जमा करवा दिया है। हालांकि, ट्रांसपोर्टर ने जो पावती दी, वह किसी अन्य वाहन की थी। धोखाधड़ी सामने आने पर मामला करवाया दर्ज जब जियो कंपनी की तरफ से 30 अक्टूबर को मेल आया और वेयरहाउस मैनेजर देवेन्द्र सिंह राठौड़ से भौतिक सत्यापन किया गया, तब खुलासा हुआ कि टावर वेयरहाउस में भौतिक रूप से जमा ही नहीं हुआ है और ट्रांसपोर्टर की ओर से दिए गए कागज पूरी तरह फर्जी, बनावटी और कूटरचित हैं। धोखाधड़ी के सामने आने के बाद पुलिस ने परिवादी की रिपोर्ट पर आरोपी ट्रांसपोर्टर श्रवण के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।