पंचायत चुनाव में आरक्षण के चलते बदले चुनावी समीकरणों के बीच करौली जिले के गुडला गांव में एक लव मैरिज ने ऐसी राजनीतिक एकजुटता की राह बनाई, जिसकी चर्चा अब गांव से लेकर जिले तक हो रही है। गुर्जर बाहुल्य गुडला गांव में सरपंच पद अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित हुआ तो गुर्जर समाज ने धानका समाज की नैना धानका को चुनाव मैदान में उतारा। नैना की शादी गुर्जर समाज के राहुल गुर्जर से हुई है। इस रिश्ते को दोनों समाजों के बीच एकजुटता की कड़ी बनाकर चुनावी रणनीति तैयार की गई। गुर्जर और धानका समाज के संयुक्त समर्थन से नैना ने 2,107 वोट हासिल किए और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी हरिओम मीणा को 1,864 वोटों से हराकर सरपंच पद पर कब्जा जमाया। जीत के बाद समर्थकों ने गांव में जुलूस निकालकर जश्न मनाया। आरक्षण ने बदले समीकरण, बैठक में बनी चुनावी रणनीति यह मामला करौली जिले की सादौली ग्राम पंचायत के गुडला गांव का है। गुर्जर बाहुल्य इस गांव में लंबे समय से गुर्जर समाज के सरपंच चुने जाते रहे हैं। इस बार पंचायत चुनाव में सरपंच पद ST वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद समाज के सामने अपने पसंदीदा उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारने की चुनौती खड़ी हो गई। आरक्षण की घोषणा के बाद ग्रामीणों ने बैठक कर चुनावी रणनीति पर चर्चा की। लव मैरिज बनी दोनों समाजों को जोड़ने की कड़ी बैठक में राहुल गुर्जर का नाम सामने आया। राहुल गुर्जर ने अनुसूचित जनजाति समुदाय की नैना धानका से लव मैरिज की थी। इसके बाद ग्रामीणों और समाज के लोगों ने नैना को सरपंच पद का चुनाव लड़ाने का फैसला किया। इस तरह एक पारिवारिक रिश्ते को सामाजिक सहमति और चुनावी रणनीति का आधार बनाया गया। गुर्जर और धानका समाज के लोगों ने एकजुट होकर नैना के समर्थन में प्रचार की जिम्मेदारी संभाली। घर-घर पहुंचा संयुक्त प्रचार, विकास को बनाया मुद्दा चुनाव प्रचार के दौरान दोनों समाजों के लोगों ने घर-घर जाकर ग्रामीणों से संपर्क किया। नैना के पक्ष में मतदान की अपील करते हुए सामाजिक एकता और गांव के विकास को प्रमुख मुद्दा बनाया गया। संयुक्त प्रचार और आपसी समर्थन का असर चुनाव परिणाम में भी दिखाई दिया। 11 प्रत्याशियों के बीच 1,864 वोटों से जीत चुनाव परिणाम में नैना धानका को 2,107 वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रहे हरिओम मीणा को 243 वोट हासिल हुए। इस तरह नैना ने 1,864 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। कुल 11 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। जीत की घोषणा के बाद समर्थकों ने गांव में जुलूस निकालकर खुशी मनाई। युवा और शिक्षित हैं नैना, विकास की उम्मीदें नैना धानका युवा और शिक्षित महिला हैं। ग्रामीणों के अनुसार, वह गांव के विकास के लिए काम करना चाहती हैं। उनकी जीत को गुर्जर और धानका समाज के संयुक्त समर्थन के परिणाम के रूप में देखा जा रहा है। अब ग्रामीणों की उम्मीदें नई सरपंच से हैं कि वह गांव की विकास योजनाओं और पंचायत की जिम्मेदारियों को किस तरह आगे बढ़ाती हैं। आरक्षण, रिश्ते और ग्रामीण राजनीति की अनूठी तस्वीर गुडला गांव का यह चुनाव इसलिए खास बन गया है कि आरक्षित सीट पर उम्मीदवार तय करने के लिए ग्रामीणों ने सामाजिक सहमति का रास्ता अपनाया। राहुल और नैना की लव मैरिज दोनों समाजों को एक मंच पर लाने का माध्यम बनी और इसी एकजुटता ने चुनावी मुकाबले में नैना को बड़ी जीत दिलाई। अब यह चुनाव ग्रामीण राजनीति में आरक्षण, सामाजिक समीकरण और व्यक्तिगत रिश्तों के राजनीतिक प्रभाव को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।