कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों का तनाव कम करने और उन्हें मानसिक संबल देने के लिए मंगलवार को जिला कलेक्टर डॉ. पीयूष समारिया ने छात्रों से खुलकर बातचीत की। कुन्हाड़ी स्थित कोचिंग संस्थान के ऑडिटोरियम में सत्र के दौरान प्रशिक्षु आईएएस सृष्टि डबास और उत्कर्ष यादव ने भी अपनी यूपीएससी और आईआईटी की तैयारी के अनुभव साझा किए। अधिकारियों ने छात्रों की जिज्ञासाएं सुनीं और अपनी बातों से माहौल को इतना हल्का कर दिया कि पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। सेशन के बाद कलेक्टर और अधिकारियों ने कोचिंग छात्रों के साथ फुलझड़ी जलाकर दीपावली मनाई। ओवरथिंकिंग से बचें और माता-पिता से बात करें जिला कलेक्टर डॉ. पीयूष समारिया ने छात्रों को सलाह दी कि वे माता-पिता की अपेक्षाओं का तनाव मन में न पालें। माता-पिता सबसे बड़े शुभचिंतक हैं, उनसे अपने मन की बात शेयर करें। उन्होंने कहा कि सपने देखें और मेहनत करें, लेकिन अगर सपने पूरे न हों तो टूटें नहीं, बल्कि और मजबूत बनें। परीक्षा जिंदगी का एक हिस्सा है, पूरी जिंदगी नहीं। छात्र अपनी क्षमता पहचानकर लक्ष्य करें तय लक्ष्य के अनुरूप पढ़ाई न हो पाने पर होने वाले तनाव के सवाल पर कलेक्टर ने कहा कि छात्र अपनी क्षमता पहचानकर व्यावहारिक लक्ष्य तय करें। पूरे दिन लगातार पढ़ने के बजाय बीच-बीच में ब्रेक लें और अपनी पसंदीदा एक्टिविटी करें। सोशल मीडिया से बचें और पढ़ाई पर करें फोकस 2023 बैच की आईएएस सृष्टि डबास ने अपने पहले ही प्रयास में मिली सफलता का राज साझा करते हुए बताया कि उन्होंने इसे अंतिम प्रयास मानकर पॉजिटिव सोच के साथ परीक्षा दी थी। उन्होंने छात्रों को सोशल मीडिया के भटकाव से बचने और पढ़ाई में फोकस बनाए रखने की सलाह दी। डाउट्स के समाधान के लिए फैकल्टी और दोस्तों से करें चर्चा प्रशिक्षु आईएएस उत्कर्ष यादव ने कोटा से कोचिंग, आईआईटी में चयन और फिर यूपीएससी तक के सफर को याद करते हुए कहा कि कोचिंग के दौरान आने वाली मुश्किलें भविष्य के लिए निखारती हैं। गलतियों से सीखें और डाउट्स के समाधान के लिए फैकल्टी और दोस्तों से चर्चा करें।