गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज कोटा के स्टाफ पर एक बार फिर लापरवाही के आरोप लगे हैं। आरोप है कि लैब की एक गलत रिपोर्ट के कारण युवक को 10-12 दिनों तक डिप्रेशन का सामना करना पड़ा। युवक ने सीएमएचओ के नाम शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि जब मामले को लेकर अस्पताल के स्टाफ से बात की तो उनका कहना था कि मशीन 24 घंटे चलती है, गर्म होने से गलत रिपोर्ट बन गई होगी। यह है पूरा मामला कोटा निवासी गौरव राठौड़ ने बताया कि उन्होंने गत 21 अक्टूबर को जीएमसी कोटा में अपनी किडनी की नियमित जांच (क्रिएटनाइन) करवाई थी। अस्पताल द्वारा जारी रिपोर्ट में उनका क्रिएटनाइन स्तर 6.33 mg/dL दर्शाया गया, जो कि सीधे तौर पर किडनी फेलियर का संकेत होता है। इस रिपोर्ट को देखते ही मरीज और उनका पूरा परिवार सदमे में आ गया। रिपोर्ट के आधार पर पीड़ित युवक पिछले 10 से 12 दिनों मानसिक तनाव से गुजरता रहा। दोबारा जांच कराने पर अस्पताल की रिपोर्ट पर संदेह होने पर मरीज ने 2 नवंबर को कोटा के ही एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर में दोबारा क्रिएटनाइन की जांच करवाई। वहां आई रिपोर्ट में क्रिएटनाइन का स्तर 1.88 mg/dL निकला। दोनों रिपोर्टों के आंकड़ों में जमीन-आसमान का अंतर देखकर पीड़ित 3 नवंबर को इस गड़बड़ी की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचा तो मौजूद लैब स्टाफ ने गैर-जिम्मेदाराना जवाब दिया। युवक ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कोटा को शिकायत भेजी है।