कोटा के मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में 32 वर्षीय महिला की दुर्लभ बीमारी का सफल इलाज किया गया। चित्तौड़गढ़ के श्रीपुरा निवासी महिला को शरीर के दाहिने हिस्से में लकवे की शिकायत के बाद 19 अक्टूबर को भर्ती कराया गया था। जांच में दाहिने हाथ का ब्लड प्रेशर 220/50 मिला, जबकि बाएं हाथ में नाड़ी नहीं मिल रही थी। डॉक्टरों ने सीटी एंजियोग्राफी के जरिए धमनियों की दुर्लभ बीमारी 'ताकायासु आर्टेराइटिस' की पुष्टि की। आयुष्मान योजना के तहत 16 दिन तक चले निशुल्क इलाज के बाद मंगलवार को महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। एक हाथ में नहीं मिल रही थी नाड़ी, दूसरे का BP 220/50 दरअसल, मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल की मेडिकल यूनिट में धमनियों की दुर्लभ और गंभीर बीमारी से पीड़ित 32 वर्षीय महिला का सफल उपचार किया गया। चित्तौड़गढ़ जिले के श्रीपुरा निवासी महिला को शरीर के दाहिने हिस्से में लकवे की शिकायत के बाद 19 अक्टूबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. पंकज जैन ने बताया कि भर्ती के समय मरीज की जांच में कई गंभीर लक्षण सामने आए। दाहिने हाथ में नाड़ी मिल रही थी, लेकिन बाएं हाथ में पल्स बिल्कुल नहीं आ रही थी। दाहिने हाथ का ब्लड प्रेशर 220/50 था। इसके साथ ही मरीज का ऑक्सीजन सैचुरेशन भी कम था। सीटी एंजियोग्राफी से हुई दुर्लभ बीमारी की पुष्टि मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत उसे नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन (NIV) पर लिया और आवश्यक उपचार शुरू किया। मरीज की मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर डॉक्टरों को धमनियों की दुर्लभ बीमारी ताकायासु आर्टेराइटिस होने का संदेह हुआ। धमनियों की स्थिति का पता लगाने के लिए सीटी एंजियोग्राफी कराई गई। जांच में ताकायासु आर्टेराइटिस की पुष्टि हुई। इसके बाद डॉक्टरों ने मरीज का उपचार जारी रखा। आयुष्मान योजना के तहत हुआ निशुल्क इलाज अस्पताल में 16 दिनों तक चले उपचार के बाद महिला की स्थिति संतोषप्रद हुई। इसके बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मरीज का इलाज आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क किया गया।