कोटा में सांगोद पंचायत समिति की पहली बार बनी ग्राम पंचायत तहरोली के सरपंच चुनाव में जिला प्रमुख मुकेश मेघवाल के बेटे कपिल मेघवाल का हारना सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। पहले चरण में इस चुनावी दंगल से पहले गांव में एक रोचक घटनाक्रम हुआ। घर-घर जाकर डाली थी पर्चियां करीब 400 मतदाताओं वाले तहरोली गांव से सरपंच के लिए चार दावेदार कपिल मेघवाल, सुरेंद्र मेघवाल, रामस्वरूप मेघवाल और ललित मेघवाल दावेदार थे। मतों का बिखराव रोकने के लिए ग्रामीणों ने अधिकृत मतदान से पहले अपने स्तर पर घर-घर जाकर पर्चियां डलवाकर गुप्त मतदान (मॉक पोलिंग) कराया। तय हुआ था कि जिसके नाम को सवधिक पर्चिया निकलेंगी, वही गांव का एकमात्र अधिकृत प्रत्याशी रहेगा और बाकी तीन अपना दावा छोड़ देंगे। प्रत्याशी तय करने के लिए गांव की वोटिंग में जिला प्रमुख के बेटे को सर्वाधिक 53 पर्चियां मिली इस आंतरिक चुनाव में जिला प्रमुख के बेटे कपिल मेघवाल को सर्वाधिक 53, सुरेंद्र को 21, ललित को 19 और रामस्वरूप को 15 पर्चियां मिली, लेकिन यह सहमति दो दिन भी नहीं टिक सकी और अन्य प्रत्याशी ललित मेघवाल समझौते से मुकर गए और उन्होंने नामांकन भर दिया। गंगाजल उठाकर खाई सौगंध, फिर भी नहीं बनी बात गांव के भैरूलाल का कहना है कि इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ। मर्यादा बनाए रखने के लिए बाकायदा गंगाजल उठाकर सौगंध खाई गई कि कोई भी भीतरपात या बगावत नहीं करेगा। फिर भी बात नहीं बनी। उनका कहना है कि समझौते से ललित मुकरता नहीं तो 200 वोट कपिल के खाते में जुड़ते और आंकड़ा 600 के पर पहुंच जाता। इससे परिणाम उनके पक्ष में जा सकता था। तीसरे स्थान पर रहे कपिल गांव के नेघराज गुर्जर का कहना है कि तहरीली पंचायत में गांटीलिया, किशनपुरा, अतरालिया और घटाल गांवों के करीब 2100 मतदाताओं के बीच कुल 6 प्रत्याशी मैदान में थे। इसमें तहरोली से दो हो गए, जबकि अतरालिया गांव से अकेले प्रत्याशी के रूप में उतरे आकाश मेहरा को अपने गांव के करीब 600 वोटर्स का एकतरफा समर्थन मिला और वे चुनाव जीत गए। किशनपुरा के ओमप्रकाश बैरवा दूसरे स्थान पर रहे। जिला प्रमुख बेटे कपिल मेघवाल लगभग 400 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे और बगावत कर अलग लड़े ललित मेघवाल ने 200 वोट लेकर पूरा समीकरण बिगाड़ दिया