भास्कर न्यूज | राजसमंद पंचायतीराज चुनाव के बाद राजसमंद पंचायत समिति की 44 ग्राम पंचायतों में चुने गए सरपंचों के शपथ पत्रों के विश्लेषण से ग्रामीण राजनीति की दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। एक ही पंचायत समिति में करोड़ों रुपए की संपत्ति वाले जनप्रतिनिधि भी हैं और कुछ लाख रुपए की कुल संपत्ति वाले सरपंच भी। मोही ग्राम पंचायत की सरपंच दयालकंवर 3.93 करोड़ रुपए की संपत्ति के साथ सबसे अमीर हैं, जबकि सोनियाणा की सरपंच प्रेमीदेवी की कुल संपत्ति 2.47 लाख रुपए दर्ज है। यानी सबसे अमीर और सबसे कम संपत्ति वाले सरपंच की संपत्ति में करीब 159 गुना का अंतर है। उम्र और शिक्षा के लिहाज से भी इस बार पंचायतों में नए चेहरे सामने आए हैं। कुल 44 सरपंचों में से 21 की उम्र 20 से 40 वर्ष के बीच है। वहीं, 9 सरपंच स्नातक या इससे अधिक शिक्षित हैं। आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण राजनीति में अलग-अलग आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोगों को प्रतिनिधित्व मिला है। सरपंचों के शपथ पत्रों में दर्ज संपत्ति के अनुसार मोही की दयालकंवर 3.93 करोड़ रुपए के साथ पहले स्थान पर हैं। देवपुरा के मार्बल व्यवसायी देवीलाल प्रजापत 3.30 करोड़ रुपए की संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर हैं। केलवा के मार्बल व्यापारी नारायण तेली की संपत्ति 2.46 करोड़ रुपए, भाटोली के रमेश देराश्री की 1.72 करोड़ रुपए और बामन टूकड़ा के मार्बल व्यवसायी लक्ष्मण तेली की कुल संपत्ति 1 करोड़ रुपए दर्ज है। दूसरी ओर, सोनियाणा की प्रेमीदेवी 2.47 लाख रुपए की संपत्ति के साथ सबसे कम संपत्ति वाली सरपंच हैं। वणाई के बंशीलाल के पास 2.50 लाख रुपए, तलाई के घीसाराम भील के पास 3.60 लाख रुपए और सथाणा की पपूड़ी सालवी के पास 3.88 लाख रुपए की चल-अचल संपत्ति है। इस तरह करोड़ों की संपत्ति वाले और सीमित आर्थिक संसाधनों वाले प्रतिनिधि एक ही पंचायत समिति में चुनकर आए हैं। दिनेश श्रीमाली, विश्लेषक दिनेश श्रीमाली के अनुसार ग्रामीण मतदाता अब अधिक जागरूक हो रहे हैं। प्रत्याशी करोड़पति है या सीमित आर्थिक संसाधनों वाला, यह अकेला चुनाव जीतने का आधार नहीं रह गया है। पंचायत स्तर पर उम्मीदवार की उपलब्धता, गांव के मुद्दों की समझ और लोगों से व्यक्तिगत संबंध महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। युवाओं और उच्च शिक्षित जनप्रतिनिधियों के आने से पंचायतों की कार्यप्रणाली में सुधार और डिजिटल योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन में मदद मिल सकती है। शिक्षा: 9 सरपंच स्नातक या इससे अधिक शिक्षित: शैक्षणिक योग्यता के मामले में 44 में से 9 सरपंच स्नातक या इससे अधिक शिक्षित हैं। खटामला की कृष्णाकंवर और कुंवारिया की दीपिका श्रीमाली ने स्नातकोत्तर यानी एमए तक पढ़ाई की है। वहीं, 19 सरपंच पांचवीं से बारहवीं कक्षा तक शिक्षित हैं, जबकि 16 सरपंच साक्षर श्रेणी में आते हैं। राजसमंद क्षेत्र में मार्बल उद्योग का प्रभाव ग्रामीण राजनीति में भी दिखाई दे रहा है। सबसे अधिक संपत्ति वाले सरपंचों में देवपुरा के देवीलाल प्रजापत, केलवा के नारायण तेली और बामन टूकड़ा के लक्ष्मण तेली मार्बल कारोबार से जुड़े हैं। वहीं, अलग-अलग आर्थिक पृष्ठभूमि के प्रत्याशियों का जीतकर आना बताता है कि पंचायतों में मतदाताओं ने केवल आर्थिक हैसियत के आधार पर प्रतिनिधि नहीं चुने। युवा नेतृत्व : 22 साल की रेखाकुमारी सबसे कम उम्र की सरपंच: उम्र के आंकड़ों के अनुसार 44 सरपंचों में 21 की उम्र 20 से 40 वर्ष, 13 की उम्र 41 से 50 वर्ष और 10 की उम्र 51 से 70 वर्ष के बीच है। पुठोल की रेखाकुमारी महज 22 वर्ष की उम्र में सबसे युवा सरपंच चुनी गई हैं। धायला की कृष्णाकंवर (26), घाटी की पारस देवी (29), पीपलांत्री के नवीन पालीवाल (30), लवाणा की कमला भील (30) और खटामला की तारादेवी (31) भी युवा नेतृत्व का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। वहीं, मोही की दयालकंवर 70 वर्ष की उम्र के साथ सबसे अधिक उम्र की सरपंच हैं।