जिले में पंचायत चुनाव के दूसरे चरण के परिणामों ने भीलवाड़ा की स्थानीय राजनीति के बड़े-बड़े धुरंधरों को चौंका दिया है। सत्ता, राजनीतिक रसूख और दशकों पुराने पारिवारिक वर्चस्व पर इस बार जमीनी मुद्दे और बदलाव की लहर पूरी तरह भारी पड़ी। राजनीतिक घरानों की विरासत वाली सीटों से लेकर कई-कई बार सरपंच रह चुके दिग्गजों को जनता ने नकार दिया है, वहीं मजदूरी करने वाले साधारण परिवारों के युवाओं ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर नई इबारत लिखी है। फुलिया कलां ग्राम पंचायत में वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व सरपंच किशन गोदारा को युवा छात्र नेता शिवराज आचार्य ने हरा दिया। पहली बार चुनाव लड़े शिवराज के पिता हम्माली यानी मजदूरी का काम करते हैं। वहीं ब्राह्मणों की सरेरी में मुकेश कुमार तिवारी उपसरपंच पद से अब सरपंच बन गए हैं। दौलतगढ़ में एक ही परिवार की देवरानी और जेठानी भामिनी राठौड़, गरिमा राठौड़ और धनकंवर चुनावी मैदान में थीं। पूर्व सरपंच मुकेश शर्मा की पत्नी कोमल शर्मा भी यहां से चुनाव लड़ीं, जिन्हें हार मिली और गरिमा राठौड़ सरपंच चुनी गईं। मोड़ का निम्बाहेड़ा में राकेश जायसवाल ने दो पूर्व सरपंच पुत्रों अशोक सर्वा और भगवान माली को हराकर जीत दर्ज की। चुनाव परिणामों में सबसे बड़ा उलटफेर फुलियां कलां पंचायत समिति की सांगरिया ग्राम पंचायत में देखने को मिला। यहां खुद 3 बार सरपंच रह चुके और पूर्व उपप्रधान गजराज सिंह राणावत चुनाव हार गए। राणावत परिवार से उनकी पत्नी मरुधर कंवर व पिता संपत सिंह प्रधान रह चुके हैं और पुत्रवधू भी सरपंच रही हैं। इस बार यहाँ शाहपुरा कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष महावीर प्रसाद कुमावत ने जीत हासिल की। इसी तरह सणगारी में शाहपुरा की निवर्तमान प्रधान माया जाट को हार झेलनी पड़ी और निवर्तमान सरपंच भागचंद चाड़ा की पत्नी ललता देवी विजयी रहीं। देवरिया में कर्नाटक के पूर्व राज्यपाल थावरचंद गहलोत के ओएसडी शंकर गुर्जर की पत्नी व निवर्तमान सरपंच किस्मत गुर्जर चुनाव हार गईं, उन्हें धर्म प्रकाश ने हराया। सहाड़ा के खांखला में चार बार उपसरपंच व पिछले कार्यकाल में सरपंच रहे रतन लाल स्वर्णकार खुद वार्ड पंच का चुनाव हार गए और उनकी पुत्रवधू दीपिका स्वर्णकार को पारस देवी ने पराजित किया। मोतीपुर में भी दो बार की सरपंच गीता जाट को हराकर जानी देवी ने जीत दर्ज की।