पाली के साहित्यकार ललितेश रंजना कुलश्रेष्ठ के उपन्यास ‘कालजयी’ का नई दिल्ली के विज्ञान भवन में विश्व हिंदी परिषद के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विमोचन हुआ। देशभर से चयनित पांच साहित्यिक पुस्तकों में ‘कालजयी’ को जगह मिलने से पाली का साहित्यिक गौरव अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ा है। 30 और 31 अक्टूबर को आयोजित इस सम्मेलन में भारत सहित करीब 20 देशों के हिंदी साहित्यकारों ने भाग लिया। उपन्यास ‘कालजयी’ बेटियों के अस्तित्व, सम्मान और जीवन के अधिकार जैसे संवेदनशील सामाजिक विषयों पर आधारित है। इसमें सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्ण मानसिकता के बीच बेटियों को अपने अस्तित्व के लिए करने वाला संघर्ष मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने अपनी रचना से बेटियों को एक जैसे मौके, शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान देने का संदेश दिया है। बेटियों के सशक्तीकरण का संदेश साहित्यकार ललितेश कुलश्रेष्ठ ने उपन्यास के जरिए बेटियों के सम्मान और सशक्तीकरण का जो संदेश दिया है, उसे अपने पारिवारिक जीवन में भी अपनाया है। उन्होंने पत्नी रंजना कुलश्रेष्ठ को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया, जो वर्तमान में प्रधानाचार्य के पद पर सेवाएं दे रही हैं। वहीं, दोनों बेटियों को समान अवसर और बेहतर शिक्षा प्रदान की, जो आज बहुराष्ट्रीय कंपनियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं। ये रहे मौजूद विश्व हिंदी परिषद की ओर से ‘भारत रत्न अटल : हिंदी राष्ट्रवाद और सुशासन’ विषय पर आयोजित सम्मेलन का शुभारंभ पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार, केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे और परिषद अध्यक्ष आचार्य थारलगडा लक्ष्मी प्रसाद सहित कई विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। सम्मेलन के विशेष हिंदी साहित्य पुस्तक विमोचन सत्र में उपन्यास ‘कालजयी’ का विमोचन किया गया। परिषद की शोध पत्रिका ‘विश्व हिंदी अन्वेषिका’ का विशेषांक भी अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित किया गया।