जरा इस टॉयलेट की दीवारों पर लिखा पढ़िए... किसी महिला के बारे में कोई इतना गंदा कैसे लिख सकता है? किसने लिखा होगा? उसकी क्या सोच रही होगी? ऐसी सोच वाले समाज में महिलाएं सहज कैसे रह सकती हैं? जब भास्कर रिपोर्टर ने पढ़ा तो ये सब सवाल उसके मन में आए? मैं जयपुर के महिला पब्लिक टॉयलेट्स में यह सब पढ़ रही थी। टॉयलेट्स की स्थिति देखने गई थी, गंदगी सिर्फ फर्श और सीटों पर ही नहीं थी, महिलाओं के प्रति इस सोच की सड़ांध उससे भी भयानक थी। अश्लील टिप्पणियां, भद्दी गालियां और आपत्तिजनक चित्र बने थे। लिखने वालों ने मोबाइल नंबर तक लिख रखे हैं। मन में एक सवाल उठा- अगर किसी पुरुष को यहां लाकर ये सब पढ़ने को कहा जाए तो उसकी प्रतिक्रिया क्या होगी? आप भी पढ़िए और सोचिए... कैसा लगा? नजर फिर से दीवारों पर लिखे मोबाइल नंबर पर गई। ये नंबर किसके हैं और किसने लिखे? क्या यह किसी की निजता का उल्लंघन नहीं होता? सार्वजनिक जगह पर नंबर लिख देना क्या उसके लिए अवांछित कॉल और उत्पीड़न का खतरा नहीं बनेगा? सवाल केवल दीवार खराब करने का नहीं, महिलाओं के लिए आरक्षित जगह को अश्लील टिप्पणियां लिखने का माध्यम बना दिया गया। जब इन्हें हटाया नहीं जाता, तो ऐसी हरकतों को रोकने की जिम्मेदारी भी अधूरी रह जाती है। इस अनुभव में मुझे एक ही शौचालय में दो गंदगियां दिखीं। महिलाएं क्या करें? उन्हें तो इन्हीं दीवारों के बीच शौचालय इस्तेमाल करना है। वे चाहकर भी इसे अनदेखा नहीं कर सकतीं। आखिर कब तक महिलाओं को इस तरह अपमान सहना होगा? झोटवाड़ा से मालवीय नगर और परकोटे में नाहरगढ़ रोड, खजाने वालों का रास्ता तक 70 से अधिक लेडीज टॉयलेट्स भास्कर रिपोर्टर्स ने देखे। 30 से ज्यादा टॉयलेट्स में बेहद भद्दे कमेंट्स लिखे मिले, अश्लील चित्र भी बने थे। उनमें से कुछ कमेंट्स और चित्र इस फोटो में संग्रहीत किए हैं। कुछ चित्र और कमेंट्स तो ऐसे हैं जिन्हें यहां ना तो लिखा जा सकता है, ना छापा जा सकता है।