जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश आलोक सुरोलिया ने शनिवार को शहर के तीन साल पुराने शहर के चर्चित अपहरण व दुष्कर्म के एक मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया। साथ ही दो अन्य धाराओं में भी 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सभी सजा एक साथ चलेगी। अभियोजक के अनुसार 5 मई 23 को पीड़िता अपने परिचित के साथ आकाशवाणी केंद्र के पास पहाड़ी पर गई थी। इसी दौरान आरोपी अकतासा, असनावर निवासी अमरलाल पुत्र देवीलाल वहां पहुंचा और हथियार दिखाकर उन्हें धमकाया। आरोपी ने पीड़िता का वीडियो बनाकर उसे और उसके परिवार को बदनाम करने की धमकी दी। इसके बाद उसे जंगल की ओर ले जाकर दुष्कर्म किया। आरोपी ने इस दौरान पीड़िता के फोटो भी खींच लिए थे। घटना के बाद आरोपी उसे बाइक पर बैठाकर एक स्थान पर छोड़कर चला गया। पीड़िता की रिपोर्ट पर महिला थाना पुलिस ने जांच पूरी कर आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया। लोक अभियोजक नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए कोर्ट 26 गवाह और 88 दस्तावेज पेश किए। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। पुलिस से बचने के लिए सफारी सूट पर पहन ली थी दूसरी ड्रेस आरोपी काफी शातिर था। िकसी को कोई शक नहीं हो और पुलिस से बचने के लिए उसने वारदात के दौरान सफारी सूट पहना हुआ था, उसी के ऊपर उसने जिंस और टी शर्ट पहन लिया। जब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया तो यह देख पुलिस भी हैरान रह गई थी। गिरफ्तारी के 8 घंटे बाद ही हो गया था थाने से आरोपी फरार घटना के कुछ घंटे बाद ही आरोपी अमरलाल को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था, लेकिन दूसरे दिन 7 मई 23 को सुबह साढ़े 6 बजे शौच का बहाना बनाकर आरोपी महिला थाने से फरार हो गया। इससे पहले उसने पेट दर्द का बहाना बनाया तो दो बार पुलिस उसे अस्पताल भी ले गई। दुष्कर्म के आरोपी के फरार होने पर तत्कालीन एसपी ऋचा तोमर ने दो एएसपी, 14 एसएचओ व 250 कांस्टेबलों की टीम बनाकर आरोपी की पांच दिन तक जंगलों में तलाश की। 10 मई को आरोपी को मोड़क से उसके रिश्तेदार के यहां से गिरफ्तार किया था। आरोपी थाने से फरार होने के बाद पहले नाले के नीचे, जंगल में छुप गया था, बाद में ट्रेन से मोड़क पहुंचकर अपने रिश्तेदार के यहां शरण ली थी। उस पर 10 हजार का इनाम भी घोषित था।