जिले में सरपंचों के चुनाव में कहीं प्रत्याशियों की भीड़ ने वोटों का ऐसा बिखराव किया कि 81% जनता के खिलाफ होने के बावजूद महज 18.6% वोट पाने वाला प्रत्याशी सरपंच बन गया, तो कहीं एकतरफा मुकाबले में एक प्रत्याशी ने 72% से ज्यादा वोट अपनी झोली में डाल लिए। पाली, रोहट, बाली और देसूरी में कांटे की टक्कर रही। आलम यह रहा कि जिले की 58% ग्राम पंचायतों में हार-जीत का अंतर 100 वोटों के भीतर सिमट गया। दिलचस्प बात यह है कि कई करीबी मुकाबलों में हार-जीत के अंतर से ज्यादा वोट खारिज (निरस्त) हो गए, जिसने सीधे तौर पर नतीजों को प्रभावित किया। कुल सीटों में से 31 पंचायतों में हार-जीत का अंतर 50 वोटों से कम रहा, कुल 83 पंचायतों में मुकाबला 100 वोटों के भीतर सिमट गया। केवल 15 पंचायतों में जीत का अंतर 500 वोटों से अधिक रहा। 58% सीटों पर परिणाम 100 वोटों से कम पर सिमटने से यह साबित होता है कि जिला स्तर पर स्थानीय पंचायती चुनाव अत्यधिक प्रतिस्पर्धात्मक रहे। इन चुनावों में देसूरी की मगरतलाव पंचायत से हमेरा राम तथा पाली की भांवरी पंचायत से रीना कुमारी बिना किसी विरोधी उम्मीदवार के चुने गए।