पंचायत चुनावों में अब दीपावली को ‘लक्ष्मी जी’ पूजन के बाद भाजपा प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी होगी। पार्टी ने प्रत्याशियों के परिवारों की डिमांड के बाद बाड़ेबंदी की रणनीति में बदलाव किया है। जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों को अलग अलग होटलों में रखा जाएगा। भाजपा प्रत्याशियों के बाड़ेबंदी की पूरी जिम्मेदारी विधायकों व जिला अध्यक्षों को दी गई है। वहीं संभाग व चुनाव प्रभारियों को लगातार फीडबैक लेने और निगरानी रखने को कहा गया है। हालांकि प्रदेश नेतृत्व ने कड़ी टक्कर और तोडफ़ोड़ की ज्यादा संभावना वाली कुछ पंचायत समितियों में दीपावली से पहले ही प्रत्याशियों को बुलाने की अनुमति भी दे दी है। सेंधमारी के डर से प्रत्याशियों का बदलेगा ‘मूवमेंट’ विरोधियों की ओर से सेंधमारी के डर से प्रशिक्षण के नाम पर प्रत्याशियों की दूसरे जिलों व पंचायत समितियों में ‘मूवमेंट बदली’ होगी। जिला परिषद प्रत्याशियों की उदयपुर, कुंभलगढ़, रणथम्भौर, माउंट आबू, पुष्कर और जयपुर के बड़े होटल-रिसॉर्ट्स में ‘बाडेबंदी’ होगी। इसके लिए होटल-रिसॉर्ट्स में बुकिंग की गई है। भाजपा ने इस बाड़ेबंदी को ‘मतगणना प्रशिक्षण’ का नाम दिया है। नेताओं की दलील है कि पार्टी की रीति-नीति और कार्यों के बारे में जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण रखे जाते हैं। जिला प्रमुख व प्रधान बनाने का लक्ष्य, पदाधिकारियों की निगरानी भाजपा ने ज्यादा से ज्यादा जिलों में जिला प्रमुख व पंचायत समितियों में प्रधान बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए जिला परिषद व पंचायत समिति के हर सदस्य को वोट महत्वपूर्ण हो गया है। इसको देखते हुए प्रत्याशियों को एक साथ रखने और स्थानीय स्तर पर तालमेल बनाए रखने की जिम्मेदारी संगठन के वरिष्ठ नेताओं को दी है। बाड़ेबंदी की जिम्मेदारी मिलने के बाद विधायक और जिला अध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्र के प्रत्याशियों से संपर्क में रहेंगे। प्रत्याशियों के ठहरने की जगह और उनसे जुड़ी व्यवस्था की जानकारी प्रदेश कार्यालय तक पहुंचानी होगी। इससे प्रदेश स्तर पर भी हर जिले की स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी।