आरजीएचएस में रेजिडेंस मॉड्यूल लागू होने के बाद डॉक्टरों के घर पर मरीज देखने और दवाइयां लिखने की व्यवस्था बदल गई है। अब डॉक्टर घर पर निजी लेटरहैड पर दवाइयां लिखे तो आरजीएचएस में क्लेम अप्रूव नहीं होता। इसके लिए उन्हें पहले योजना के रेजिडेंस मॉड्यूल में रजिस्टर्ड होना जरूरी है। वहीं, नॉन प्रैक्टिस अलाउंस लेने वाले सरकारी डॉक्टर भी मरीजों को दवाइयां नहीं लिख सकते, मॉड्यूल लागू होने के बाद क्लेम अप्रूवल से पहले डॉक्टर्स का एनपीए स्टेटस भी चेक किया जा रहा है। पिछले साल के मुकाबले 30% ज्यादा क्लेम यह व्यवस्था लागू होने के बाद घर पर मरीजों को देखने की संख्या में बढ़ोतरी हो गई है। जून से अक्टूबर 2026 के बीच पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले रेजिडेंस ओपीडी कंसलटेशन के क्लेम 30.4% बढ़े हैं। सरकारी डॉक्टरों के क्लेम में 29.2% और निजी डॉक्टरों के क्लेम में 51.4% की वृद्धि हुई है। गौरतलब है कि वर्तमान में आरजीएचएस में प्रदेश के 719 सरकारी औैर 115 प्राइवेट डॉक्टर्स रेजिडेंस मॉड्यूल में रजिस्टर्ड हैं। यानी ये घर पर मरीज देख सकते हैं। घर पर दिखाने वाले मरीज ज्यादा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अक्टूबर 2026 तक कुल 2,35,068 रेजिडेंस ओपीडी कंसलटेशन क्लेम हुए। इनमें सरकारी डॉक्टरों के 2,20, 662 (93.9%) और निजी डॉक्टरों के 14,406 (6.1%) क्लेम शामिल हैं। जून से अक्टूबर के बीच सरकारी डॉक्टरों के क्लेम 1.25 लाख से बढ़कर 1.62 लाख और निजी डॉक्टरों के क्लेम 6734 से बढ़कर 10,198 हो गए। कुल क्लेम 1.32 लाख से बढ़कर 1.72 लाख तक पहुंच गए। प्राइवेट डॉक्टर्स को घर पर मरीज देखने से पहले मॉड्यूल पर रजिस्ट्रेशन जरूरी है, और उसके लिए भी पहले हॉस्पिटल की एनओसी चाहिए। पिछले साल के मुकाबले क्लेम में बढ़ोतरी डॉक्टर रेजिडेंस मॉड्यूल लागू होने से प्राइवेट लेटरहैड पर दवाइयां नहीं लिखी जा सकती, सिर्फ मॉड्यूल से जनरेटेड आरजीएचएस पर्ची पर ही दवाइयां लिखी जा सकती हैं। यह मॉड्यूल डॉक्टर के आरएमसी नंबर, एनपीए स्टेटस और प्राइवेट हॉस्पिटल के डॉक्टरों की एनओसी को चैक करता है। इसके बाद क्लेम अप्रूव होता है। ऐसे में इस पर रजिस्ट्रेशन के बाद ही डॉक्टर घर पर आरजीएचएस में मरीज को देखकर दवाई लिख सकते हैं। इससे ट्रांसपेरेंसी और डिजिटल ट्रैकिंग में सुधार हुआ है। -डॉ. निधि पटेल, एसीईओ, राज. स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी