दीपावली नजदीक आते ही नागौर शहर के बाजारों में पटाखों की खरीदारी और बिक्री तेज हो गई है। दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ पहुंचने लगी है, लेकिन अधिक कमाई की होड़ में सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही है। शहर के अति व्यस्त और संकरे बाजारों में भी पटाखों की दुकानें लगा दी गई हैं। कई जगह गलियां 6 फीट से भी कम चौड़ी हैं और दोनों तरफ दोपहिया वाहन खड़े होने से रास्ता बंद हो जाता है। ऐसे में आग लगने पर दमकल की गाड़ियों का पहुंचना और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौती बन सकता है। 150 आवेदन आए, अभी सिर्फ 25 का पुलिस वेरिफिकेशन जिला कलेक्टर कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, नागौर में पटाखे बेचने के लिए कुल 150 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से अब तक केवल 25 आवेदनों का ही पुलिस वेरिफिकेशन हुआ है। इन आवेदकों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। दूसरी ओर, शहर में छोटी-बड़ी सैकड़ों दुकानें पहले ही सज चुकी हैं। ऐसे में लाइसेंस प्रक्रिया और बाजारों में दिखाई दे रही स्थिति के बीच बड़ा अंतर नजर आ रहा है। सवाल यह है कि बिना लाइसेंस दुकानें लगाने वालों की जांच कौन कर रहा है और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी? खाई गली: 6 फीट से भी कम रास्ते में 3-4 दुकानें शहर के खाई गली स्थित इंद्रा मार्केट में प्रवेश करते ही सुरक्षा इंतजामों की स्थिति सामने आ जाती है। यहां बेहद संकरी गली में 3 से 4 पटाखों की दुकानें सजा दी गई हैं। दुकानों के ठीक ऊपर बिजली के पोल पर तारों का गुच्छा और मकड़जाल फैला हुआ है। निचले हिस्से में टूटे और खुले मीटर भी लटके हुए हैं। ऐसे संवेदनशील स्थान पर पटाखों की दुकानें लगने से आगजनी का खतरा बढ़ सकता है। गली का रास्ता इतना संकरा है कि आपात स्थिति में दमकल वाहन का पहुंचना बेहद मुश्किल होगा। दोनों तरफ खड़े दोपहिया वाहनों के कारण रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है। ऐसे में आग लगने पर लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना भी चुनौती बन सकता है। किले की ढाल: एक-दूसरे से सटाकर लगा दी दुकानें शहर के किले की ढाल क्षेत्र में भी सुरक्षा नियमों की अनदेखी सामने आई है। यहां पटाखों के अस्थायी स्टॉल एक-दूसरे से सटाकर लगा दिए गए हैं। विस्फोटक अधिनियम के तहत निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार, दो अस्थायी स्टॉलों के बीच कम से कम 3 मीटर की दूरी रखी जानी चाहिए। यह दूरी इसलिए जरूरी है, ताकि आग लगने की स्थिति में एक दुकान से दूसरी दुकान तक आग फैलने का खतरा कम हो। लेकिन मौके पर दुकानें बिना किसी सुरक्षित अंतराल के संचालित होती नजर आ रही हैं। पटाखा दुकानों के लिए ये सुरक्षा इंतजाम जरूरी सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशासन की परीक्षा दीपावली पर पटाखों की बिक्री के दौरान सुरक्षा में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। शहर के भीतरी और घनी आबादी वाले बाजारों में दुकानें लगने के बाद प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है। अब जरूरी है कि पुलिस, प्रशासन और दमकल विभाग संयुक्त रूप से दुकानों का निरीक्षण करें। बिना लाइसेंस संचालित दुकानों पर कार्रवाई के साथ सुरक्षा मानकों की पालना सुनिश्चित कराई जाए। इससे आगजनी की स्थिति में दमकल वाहनों के पहुंचने और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में आने वाली परेशानी को कम किया जा सकेगा, ताकि त्योहार की खुशियां किसी हादसे में न बदलें।