यदि आपने राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल से 10वीं या 12वीं की परीक्षा पास कर ली है, तो खुश होने के बजाय आपका चिंतित होना लाजिमी है। आपकी महीनों की मेहनत पर जयपुर में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की सुस्ती भारी पड़ रही है। परीक्षा अप्रैल-मई में आयोजित हुई थी और चार महीने पहले परिणाम भी जारी कर दिया गया, लेकिन अंकतालिका (मार्कशीट) का अब तक कोई अता-पता नहीं है। नतीजा यह है कि प्रदेश भर के 1 लाख से अधिक और अकेले उदयपुर जिले के करीब 19 हजार छात्र बिना किसी गलती के अपनी आगे की पढ़ाई और जमा कराई फीस, दोनों का भारी नुकसान झेल रहे हैं। इन हालात में सवाल उठ रहा है कि जब परीक्षाएं अप्रैल-मई में संपन्न हो चुकी थीं और परिणाम आए भी महीनों बीत चुके हैं, तो अंकतालिकाएं छापने और वितरण में आखिर कौन सा महा-अभियान चल रहा है जो पूरा होने का नाम नहीं ले रहा? क्या जयपुर में बैठे अफसरों की इस गंभीर लापरवाही का हर्जाना उन हजारों गरीब और होनहार बच्चों को भुगतना पड़ेगा, जिनका पूरा एक साल और मेहनत की कमाई दांव पर लगी है? उदयपुर के 10वीं-12वीं के 19 हजार विद्यार्थी परेशान उदयपुर जिले में संचालित 30 केंद्रों में से केवल फतह स्कूल के करीब 1 हजार विद्यार्थियों को ही अंकतालिकाएं मिल सकी हैं। इसका कारण यह रहा कि वहां के सेंटर कॉर्डिनेटर ने व्यक्तिगत रूप से पत्राचार कर मार्कशीट मंगवा ली। इसके विपरीत, बाकी 29 केंद्रों के 19 हजार छात्र लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। 10वीं पास करने वाले छात्रों ने 11वीं में अस्थायी प्रवेश तो ले लिया है, लेकिन ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) जमा न होने के कारण उन्हें अब तक स्कॉलर नंबर अलॉट नहीं हो पाया है। राज्य समान परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह ऑनलाइन है। ऐसे में स्कॉलर नंबर दर्ज न होने से अर्द्धवार्षिक परीक्षा के प्रश्नपत्र जारी नहीं हो सकेंगे, जिससे छात्र अपने ही स्कूल में परीक्षा देने से वंचित रह सकते हैं। 12वीं पास छात्रों को प्रवेश से इनकार कर रहे कॉलेज 12वीं पास छात्रों की स्थिति और भी गंभीर है। उदयपुर के 19 हजार प्रभावित छात्रों में से लगभग 60 फीसदी छात्र 12वीं के हैं। कॉलेजों ने अस्थायी प्रवेश के नाम पर उनसे पूरी फीस तो जमा करवा ली, लेकिन अब टीसी और मूल अंकतालिका न होने पर पक्का एडमिशन देने से इनकार कर रहे हैं। नियमों के मुताबिक, समय पर टीसी न मिलने पर कॉलेज प्रवेश निरस्त कर देगा और जमा कराई गई फीस भी जब्त हो जाएगी। ऐसे में छात्रों की जेब भी ढीली हो चुकी है और उनका पूरा एक शैक्षणिक सत्र भी बर्बाद होने की कगार पर है। ओपन स्कूल में पढ़ाई की छूट बता दें कि राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल की व्यवस्था उन विद्यार्थियों के लिए बनाई गई है, जो नियमित स्कूल में पढ़ाई जारी नहीं रख पाते। यहां माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर विषय चयन की सुविधा मिलती है। विद्यार्थी अधिकतम सात विषय चुन सकते हैं, जबकि प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए कम से कम पांच विषयों में उत्तीर्ण होना जरूरी है।