एंटी करप्शन ब्यूरो(ACB) ने बांगड़ हॉस्पिटल के डॉक्टर रविन्द्र चारण और संविदाकर्मी सुनील परिहार के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। दोनों पर चतुर्थ श्रेणी भर्ती में दिव्यांगता प्रमाण पत्र देने के बदले 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप है। ACB पाली द्वितीय के एएसपी देरावरसिंह सोढ़ा ने बताया- शिकायतकर्ता ग्रेजुएट है और उसका चयन चतुर्थ श्रेणी भर्ती 2024 में चयन दिव्यांगता कोटे के तहत हुआ था। नियमानुसार मेडिकल बोर्ड से दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वह 10 अप्रैल 2026 को बांगड़ हॉस्पिटल पहुंचा। पूर्व के दिव्यांगता दस्तावेज डॉक्टर रविन्द्र चारण को दिखाए और मेडिकल चेकअप करवाया। उसके बाद जाने लगा तो हॉस्पिटल परिसर में ही उन्हें संविदाकर्मी सुनील परिहार (कोबरा) मिला। उसने कहा कि डॉक्टर उसका 20 प्रतिशत तक ही दिव्यांगता प्रमाण पत्र बना रहे है। 40 प्रतिशत से ज्यादा का बनवाना है, तो 50 हजार रुपए लगेंगे। पैसे देने पर वह काम करवा देगा। इसके बाद अपने मोबाइल नंबर दे दिए। पीड़ित ने इसकी शिकायत एसीबी में की। शिकायत में बताया कि वह 40 प्रतिशत से ज्यादा दिव्यांग है। फिर भी उससे 50 हजार रुपए रिश्वत दिव्यांगता प्रमाण पत्र देने के बदले मांगी जा रही है। 11 अप्रैल 2026 को शिकायत का सत्यापन करवाया गया। इसमें परिवादी और संविदाकर्मी सुनील परिहार के बीच हुई बातचीत रिकॉर्डिंग हो गई। 14 अप्रैल को रिश्वत की राशि के साथ परिवादी को बांगड़ हॉस्पिटल भेजा गया और एसीबी टीम को भी अलर्ट किया गया। लेकिन संविदाकर्मी सुनील परिहार (कोबरा) को एसीबी टीम के बांगड़ हॉस्पिटल में होने का शक हो गया। ऐसे में उसने परिवादी से रिश्वत की राशि नहीं ली और उसे जाने को बोल दिया। ऐसे में ट्रेप की कार्रवाई नहीं हो सकी थी। वॉयस रिकॉर्डर में कैद हुई रिश्वत की मांग एसीबी की टीम ने गोपनीयता बनाए रखते हुए पीड़ित को वॉयस रिकॉर्डर चलाने की प्रक्रिया समझाई और साथ में कॉन्स्टेबल सतपाल को भेजा। 12 अप्रैल को बांगड़ हॉस्पिटल परिसर में सुनील परिहार और भूराराम के बीच वॉट्सएप कॉल और मुलाकात के दौरान रिश्वत राशि से संबंधित बातचीत हुई। पूरी बातचीत एसीबी द्वारा दिए गए डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर में रिकॉर्ड हो गई थी, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।