पाली के बांगड़ अस्पताल में खांसी का इलाज करवाने गए भाई-बहनों का हार्ट और लिवर उलटी दिशा निकला। उन्हें बचपन से ही खासी और फेफड़ों में इंफेक्शन की शिकायत थी। टेस्ट करने के बाद डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को जोधपुर एम्स रेफर कर दिया है। यह दुर्लभ बीमारी 50 हजार में से एक बच्चे को होती है। डॉक्टरों का कहना है कि दोनों बच्चों में ये बीमारी होना जेनेटिक (आनुवंशिक) है। इस बीमारी का नाम कार्टाजेनर सिंड्रोम और प्राइमरी सिलियरी डिस्किनेशिया है। अब आसान शब्दों में समझिए पूरी कहानी टेस्ट में दुर्लभ बीमारी का पता चला मामले में बांगड़ हॉस्पिटल श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ लक्ष्मण सोनी बताते हैं- 25 अक्टूबर को 13 साल की बहन और 10 साल के भाई को लेकर परिजन बांगड़ हॉस्पिटल चेक करवाने आए थे। परिजनों ने बताया कि दोनों को बचपन से खांसी है और सांस लेने में दिक्कत होती है। साथ ही बार-बार निमोनिया हो जाता है। जांच करवाई तो हार्ट-लिवर उलटे थे ऐसे में दोनों बच्चों की CT स्केन, पेट की सोनोग्राफी, हार्ट की ईको, कफ, ब्लड की सारी जांचे करवाई। जिसमें सामने आया कि दोनों के हार्ट दाईं ओर और लिवर बाईं ओर स्थित है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में साइटस इनवर्सस (Situs Inversus) कहा जाता है। विशेष बात यह है कि जन्म से ही अंगों की इसी तरह की विपरीत स्थिति देखी गई है। प्रारंभिक जांच में कार्टाजेनर सिंड्रोम और प्राइमरी सिलियरी डिस्काइनेशिया की संभावना सामने आई। ऐसे में जेनेटिक काउंसिलिंग के लिए दोनों को जोधपुर एम्स के लिए रेफर किया। क्या है कार्टाजेनर सिंड्रोम और PCD? बांगड़ हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक लक्ष्मण सोनी ने बताया कि प्राइमरी सिलियरी डिस्काइनेशिया (PCD) एक दुर्लभ जेनेटिक स्थिति है। इसमें श्वसन मार्ग (रेस्पाइटरी एयर वे) की कोशिकाओं पर मौजूद सूक्ष्म बाल जैसी संरचनाएं होती हैं। एक ही परिवार के दो बच्चों में स्थिति होना क्यों है महत्वपूर्ण? डॉक्टर बोले- लगातार खांसी हो तो डॉक्टर को दिखाएं बांगड़ हॉस्पिटल श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ लक्ष्मण सोनी कहते है कि यदि किसी बच्चे में बचपन से लगातार खांसी, बार-बार फेफड़ों का संक्रमण और साइटस इनवर्सस की स्थिति दिखाई दे, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श कर PCD कार्टाजेनर सिंड्रोम की दिशा में जांच करानी चाहिए। सही समय पर एयरवे क्लीयरेंस फिजियोथेरेपी और संक्रमण के इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।