पाली में केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित 'पशु क्रूरता निवारण (प्रयोग और प्रजनन नियंत्रण) नियम, 2026' के ड्राफ्ट को लेकर जीव-दया प्रेमियों में नाराजगी सामने आई है। प्रस्तावित संशोधनों में लैब के लिए केंद्रीय अनुमति के नियम खत्म करने और आवारा पशुओं और वन्यजीवों पर प्रयोग की संभावित छूट के विरोध में सकल हिंदू समाज की ओर से बुधवार को जिला कलेक्टर को केंद्र सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा गया। संत सूरजनदास के नेतृत्व में आए लोगों ने प्रस्तावित नियमों पर कड़ा विरोध जताते हुए केंद्र सरकार से इन्हें रोकने और पहले से लागू सख्त प्रावधानों को वैसा ही रखने की मांग की। केंद्रीय अनुमति की अनिवार्यता खत्म करने का विरोध ज्ञापन में कहा गया कि पूर्व के नियमों के तहत चूहों के अलावा कुत्ते, बिल्ली, घोड़े और बंदर जैसे बड़े जानवरों पर प्रयोग करने से पहले केंद्रीय संस्था CCSEA की अनुमति अनिवार्य थी, लेकिन प्रस्तावित नियम के तहत प्रयोगशालाओं को स्व-वर्गीकरण का अधिकार देने और केंद्रीय अनुमति की अनिवार्यता समाप्त करने का प्रावधान पशुओं की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। ज्ञापन में आशंका जताई गई कि इस व्यवस्था से प्रयोगशालाओं को अपने स्तर पर परीक्षणों की मंजूरी देने की छूट मिल जाएगी, जिससे पशुओं के साथ क्रूरता की आशंका बढ़ सकती है। संगठन ने मांग की कि पूर्व की तरह केंद्रीय अनुमति की अनिवार्यता बरकरार रखी जाए। इसके साथ ही आवारा कुत्तों-बिल्लियों और संरक्षित वन्यजीवों को विशेष परिस्थितियों में प्रयोगशालाओं में परीक्षण के लिए इस्तेमाल किए जाने की संभावित छूट पर भी विरोध दर्ज कराया गया। ज्ञापन में सामुदायिक पशुओं और वन्यजीवों पर प्रयोग करने पर पूर्ण प्रतिबंध बनाए रखने की मांग की गई। प्रधानमंत्री तक पहुंचाई जाए जीव-दया प्रेमियों की आवाज सकल हिंदू समाज ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित संशोधन वापस लेने, प्रयोगशालाओं की सख्त निगरानी सुनिश्चित करने और पशुओं की सुरक्षा के लिए पूर्व निर्धारित कड़े नियमों को बनाए रखने की मांग की। साथ ही आग्रह किया कि क्षेत्र के जीव-दया प्रेमियों की भावनाओं और इन गंभीर मुद्दों को केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री तक पहुंचाया जाए। ज्ञापन सौंपते समय नरेंद्र माछर, सज्जनराज गुलेच्छा, अनिल भंडारी, महेंद्र बम्ब, बाबूलाल कुमावत, रमेश बोराणा, किरण जैन सहित कई लोग मौजूद रहे।