दिव्यांग और दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को खुशियों भरा माहौल देने के लिए स्वावलंबन फाउंडेशन की ओर से 8 दिसंबर 2026 को पाली के राजा पार्क में ‘उमंग-खुशियों का मेला’ लगाया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, इसमें राजस्थान सहित देश के अलग-अलग राज्यों से 1000 से ज्यादा दिव्यांग बच्चों के शामिल होने की उम्मीद है। बच्चों के लिए झूले, खेलकूद, मनोरंजन, भोजन, आवास और यातायात की सुविधाएं निशुल्क रहेंगी। बच्चों के आने-जाने के लिए विशेष बसों की व्यवस्था भी की जा रही है। गेम्स, झूले और मनोरंजन फ्री स्वावलंबन फाउंडेशन के अक्षत लोढ़ा और विनय गादिया ने बताया कि मेले में बच्चों के मनोरंजन के लिए कई तरह की गतिविधियां रखी जाएंगी। इनमें बलून शूटिंग, बजर गेम, लाइव टैटू, एटीवी बाइक, टीथ बकेट, जोकर, मिकी माउस, ट्रैंपोलीन और न्यू बबल हाउस शामिल हैं। इसके अलावा बच्चों के लिए विशेष सेल्फी पॉइंट भी बनाया जाएगा, जहां वे मेले के यादगार पलों को कैमरे में कैद कर सकेंगे। मेले का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को ऐसा माहौल देना है, जहां वे बिना किसी भेदभाव के दूसरे बच्चों की तरह खेल सकें और मनोरंजन कर सकें। मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाएंगे दिव्यांग बच्चे मेले में दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा को मंच देने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशेष प्रस्तुतियां होंगी। बच्चे अपनी कला, हुनर और प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। दिव्यांग कलाकार भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। इसके साथ ही खेलकूद प्रतियोगिताएं और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियां भी होंगी। 50 से अधिक एनजीओ करेंगे सहयोग मेले की व्यवस्थाओं के लिए 100 से ज्यादा वॉलंटियर सेवाएं देंगे। वहीं 50 से अधिक एनजीओ के प्रतिनिधि भी सहयोग करेंगे। बड़ी संख्या में बच्चों और उनके परिजनों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए यातायात, भोजन, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं की तैयारी की जा रही है। बच्चों की सुविधा के लिए पूरे मेला परिसर को सुगम बनाया जाएगा। चलने-फिरने में परेशानी वाले बच्चों के लिए व्हीलचेयर उपलब्ध रहेंगी। सुरक्षा के लिए पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। मेले में शामिल होने वाले हर दिव्यांग बच्चे को उपहार भी दिया जाएगा। 2022 में एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम स्वावलंबन फाउंडेशन की ओर से दिव्यांग बाल मेले की शुरुआत 2017 में जिला स्तर पर की गई थी। इसके बाद 2018 में संभाग स्तरीय और 2019 में राज्य स्तरीय मेले का आयोजन हुआ। 2022 में हुए मेले का नाम एशिया के सबसे बड़े दिव्यांग बाल मेले के रूप में एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज कराया गया। फाउंडेशन के प्रतीक सर्राफ और जयेश लोढ़ा ने बताया कि दिव्यांग बच्चों के लिए इतने बड़े स्तर पर निशुल्क मेले का आयोजन पाली की विशिष्ट पहचान बन चुका है। फाउंडेशन का प्रयास है कि हर बच्चे को समान अवसर, सम्मान और अपनत्व मिले। ‘उमंग’ के जरिए बच्चों को मनोरंजन के साथ अपनी प्रतिभा दिखाने और आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर मिलेगा।