नगर निकाय चुनाव के बाद अब गांवों में पंचायतीराज चुनाव का रंग चढ़ने लगा है। कहीं वार्ड पंच तो कहीं सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य बनने के लिए प्रत्याशी चुनावी ताल ठोक रहे हैं। लेकिन जयपुर की माधोराजपुरा पंचायत समिति के कौशल्या दास की बावड़ी गांव में चुनावी नजारा कुछ अलग ही है। यहां पंचायतीराज चुनाव का शोर भले ही पिछले 20-25 दिनों से सुनाई दे रहा हो, लेकिन गांव के तिराहे पर पिछले दो महीने से चुनावी हलचल बनी हुई है। इसकी वजह भी खास है। इस तिराहे के एक तरफ वाटिका नगर पालिका क्षेत्र है, दूसरी तरफ मोहब्बतपुरा ग्राम पंचायत और रास्ते की दूसरी बाजू पहाड़िया ग्राम पंचायत की सीमा लगती है। यानी एक ही गांव, लेकिन दो अलग-अलग ग्राम पंचायतें। गांव के कुछ मतदाता पहाड़िया ग्राम पंचायत का सरपंच चुनेंगे तो बाकी मतदाता मोहब्बतपुरा पंचायत का मुखिया। ऐसे में दोनों पंचायतों के सरपंच प्रत्याशियों का गांव में आना-जाना लगा है। कोई अपने पक्ष में वोट मांग रहा है तो कोई घर-घर पहुंचकर समर्थन जुटा रहा है। गांव का तिराहा भी मानो चुनावी प्रचार का साझा ठिकाना बन गया है। इस गांव की चुनावी कहानी में एक दिलचस्प पहलू परिवार की राजनीतिक भागीदारी भी है। पिता पूर्व सरपंच और पत्नी उप सरपंच रह चुकी हैं। अब कौशल्या दास की बावड़ी के रवि शंकर बैरवा मोहब्बतपुरा ग्राम पंचायत से सरपंच का चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, ताऊ रामकुंवार बैरवा टोंक लोकसभा से दो बार सांसद व फागी से एक बार विधायक बन चुके थे। एक ही तिराहे पर दो ग्राम पंचायतों की सियासत गांव की भौगोलिक स्थिति ही इसे चुनाव के लिहाज से खास बना रही है। यहां पंचायतों की सीमाएं इस तरह मिलती हैं कि एक ही गांव के लोगों को अलग-अलग पंचायतों के प्रतिनिधि चुनने का मौका मिलता है। यही वजह है कि चुनावी प्रचार के दौरान तिराहे पर दोनों पंचायतों की सियासत एक साथ नजर आती है। एक ओर पहाड़िया पंचायत के प्रत्याशियों की आवाजाही है तो दूसरी ओर मोहब्बतपुरा के उम्मीदवार मतदाताओं को साधने में जुटे हैं।