प्रदेश में निशुल्क दवा योजना को 15 साल हो गए, लेकिन इसे जमीन पर संचालित करने वाले सरकारी फार्मासिस्ट अब भी वर्दी, धुलाई और जोखिम भत्ते जैसी सुविधाओं से वंचित हैं। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और दवा वितरण केंद्रों पर करीब 5,800 फार्मासिस्ट सेवाएं दे रहे हैं। दूसरी ओर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग ऑफिसर, लैब टेक्नीशियन, एएनएम और असिस्टेंट रेडियोग्राफर जैसे कैडर को मैस, हार्ड ड्यूटी, वर्दी या धुलाई जैसे अलग-अलग भत्ते दिए जा रहे हैं। राजस्थान फार्मासिस्ट कर्मचारी संघ एकीकृत के संरक्षक आनंद सूरा एवं राजस्थान फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष प्रवीण कुमार सैन का कहना है कि फार्मासिस्ट दवा वितरण केंद्रों पर लगातार रसायनों, विभिन्न औषधियों और संक्रमण के संपर्क में रहते हैं। इसलिए उन्हें रिस्क अलाउंस मिलना चाहिए। दवा वितरण केंद्रों पर उनकी अलग पहचान और स्वच्छता मानकों के लिए वर्दी भत्ता तथा उसकी धुलाई के लिए भी अलग भत्ते की मांग लंबे समय से की जा रही है। फार्मासिस्ट संगठनों के अनुसार देश के कई राज्यों और केंद्रीय चिकित्सा संस्थानों में इस तरह के भत्तों का प्रावधान है। फार्मासिस्टों के भत्तों के संबंध में वित्त विभाग ने क्यूरी लगाई है। विभाग को फाइल भेजने की प्रक्रिया चल रही है। -राकेश कुमार शर्मा, निदेशक (राजपत्रित), चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग