झुंझुनूं में भी खेतों में रबी की फसलों की बुवाई का दौर शुरू हो गया है। मौसम में बदलाव और तापमान में गिरावट के साथ ही बुवाई ने जोर पकड़ लिया है। इस बार किसानों का रुझान सरसों, गेहूं और चने की ओर अधिक रहने की संभावना है। कृषि विभाग ने जिले में करीब 3 लाख 15 हजार हेक्टेयर में रबी फसलों की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा सरसों का है। विभाग ने रखा 1.40 लाख हेक्टेयर का टारगेट कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. मोहन बाबरवाल ने बताया कि जिले में रबी फसलों की बुवाई जोर पकड़ने लगी है। सबसे अधिक सरसों का 1.40 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा गेहूं और चने की बुवाई के भी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। आगामी दिनों में बुवाई की रफ्तार और बढ़ेगी। सरसों का सबसे बड़ा लक्ष्य जिले में सरसों प्रमुख रबी फसल है। कृषि विभाग ने इस बार 1.40 लाख हेक्टेयर में सरसों की बुवाई का लक्ष्य रखा है। गेहूं और चने के लिए भी 70-70 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। केवल इन तीन फसलों के लिए ही कुल 2.50 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य है। शेष क्षेत्र में जौ, तारामीरा, अन्य दलहन और दूसरी फसलें बोई जाएंगी। नवंबर में पकड़ेगी बुवाई की रफ्तार जिले में अक्टूबर से रबी फसलों की बुवाई शुरू हो जाती है, जो नवंबर और दिसंबर तक चलती है। फिलहाल किसान अगेती सरसों और चने की बुवाई कर रहे हैं। आगामी दिनों में तापमान में गिरावट और खेतों में नमी की अनुकूल स्थिति रहने पर बुवाई की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है। नवंबर में गेहूं और जौ जैसी खाद्यान्न फसलों के साथ तिलहनी फसलों की बुवाई भी जोर पकड़ेगी। फसलों की बुवाई के लिए अनुकूल तापमान और पर्याप्त नमी महत्वपूर्ण है। समय पर बुवाई होने से फसलों के अंकुरण, बढ़वार और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों की नजर मौसम के साथ-साथ खेतों में नमी की स्थिति पर भी बनी हुई है। अंधेरे में सिंचाई करने को मजबूर किसान खेतों में रबी की फसलों की बुवाई की तैयारी चल रही है। गेहूं की बुवाई के लिए किसान खेतों में प्लाव कर रहे हैं, लेकिन बिजली आपूर्ति का समय उनके लिए परेशानी बन गया है। भोर में करीब पांच बजे बिजली आने से किसानों को हड़बड़ी की सर्दी और अंधेरे के बीच खेतों में सिंचाई करनी पड़ रही है।
झुंझुनूं के रामस्वरूप ने बताया कि सुबह पांच बजे बिजली आने के समय अंधेरा रहता है और सर्दी का एहसास भी बढ़ जाता है, ऐसे में खेत में सिंचाई करना आसान नहीं होता। पानी के पाइप को संभालने के साथ खेत में पानी का बहाव भी नियंत्रित करना पड़ता है। अंधेरे में टॉर्च की रोशनी के सहारे यह काम करना किसानों की मजबूरी बन गया है। किसानों का कहना है कि गेहूं की बुवाई के लिए समय पर सिंचाई जरूरी है, लेकिन बिजली आपूर्ति का समय ऐसा होना चाहिए, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानी नहीं हो। किसानों ने बिजली आपूर्ति की व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव के समय किसानों की समस्याओं को लेकर वादे किए जाते हैं, लेकिन खेतों में काम करने के दौरान उनकी परेशानियां बनी रहती हैं। किसानों की मांग है कि कृषि कार्यों के लिए थ्री-फेज बिजली दिन में दी जाए, ताकि सर्दी और अंधेरे में राहत मिल सके। अब तक की बुवाई