पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने आईएएस शिखर अग्रवाल के एक ही कंपनी से 40 विला-कॉटेज खरीदने के मामले में सरकार पर सवाल उठाते हुए सीएम पर तंज कसा है। गहलोत ने शिखर अग्रवाल केस की एसीबी से निष्पक्ष जांच होने पर संदेह जताया है। उन्होंने कहा- एसीबी डीजी दबाव में हैं। एसीबी में एडीजी स्तर की एक महिला अधिकारी हैं। सुपर डीजी वही हैं। गहलोत शनिवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा- शिखर अग्रवाल को आपने खाली एपीओ कर दिया, आपने केस एसीबी में दर्ज कर लिया। अब अगर एसीबी तक केस रहेगा, निष्पक्ष जांच तक नहीं जाएगा। एफआईआर दर्ज नहीं होगी। अभी तो खाली पीई दर्ज हुई है, कुछ नहीं हुआ है। अब वो जांच करेंगे केस बनता या नहीं बनता। पूरे देशभर का मीडिया चिल्ला रहा है, ये अभी तक पीई में लगे हुए हैं। कब तो पीई से FIR में कन्वर्ट होगी। एफआईआर के बाद में किस प्रकार से आप बिहेव करोगे। डीजी के ऊपर कितना दबाव आएगा। डीजी तो दबावों में दबे हुए हैं। एसीबी में महिला अफसर डीजी से भी ऊपर गहलोत ने कहा- एसीबी डीजी बहुत भले आदमी हैं। महेश जोशी के केस में वो ऊपर के दबाव से इतने दब गए। कहा गया कि केस नहीं बनता है, अरेस्ट नहीं कर सकते तो उन्होंने कहा कि मैं कुछ नहीं जानता, ऊपर से दबाव है। अशोक गहलोत ने कहा- वो हुक्म चलाती हैं, अधिकारियों को डांटती हैं, फटकारती हैं। केस बन जाते हैं। जिसको टारगेट करना होता है, टारगेट करने के लिए ही मैं समझता हूं महिला एडीजी को लगाया है। ‘तुम वहां बैठो और रगड़ाई करो’ गहलोत ने कहा- महिला एडीजी को लगाया ही इसलिए कि जिनको इशारा करें, तुम वहां बैठो और रगड़ाई करो। डीजी साहब तो भले आदमी हैं, ये ज्यादा कह नहीं पाएंगे। इनका नेचर बोलने का नहीं, ज्यादा डांटने का नेचर नहीं है। आप सोच सकते हो, लोगों और बेचारों की रगड़ाई हो रही है। निर्दोष लोग फंस रहे हैं। हम चाहते हैं दोषी को आप भले ही कितनी बड़ी सजा दो, हम गर्व महसूस करेंगे। दुर्भाग्य से ये डीजी साहब और वो डीजी साहब, दोनों एक ही मायने के हैं। दोनों भले हैं। मेरे तो अच्छे संपर्क हैं, वो अलग बात है। डीजी साहब को दबाव में काम करने से मुक्त होना चाहिए। थप्पड़बाजी की घटना हुई यह साबित हो गया, शिखर भी वहां थे पूर्व सीएम ने कहा- एसीबी भी इनकी है, मुख्यमंत्री के अधीन है। मुख्यमंत्री के ऊपर जो आरोप लगा है, उनकी अध्यक्षता में मीटिंग होकर फैसला हुआ है। उसमें मुख्यमंत्री के सबसे नजदीकी अफसर शिखर अग्रवाल ही रहे थे। जो किस्सा मैं सुना रहा हूं बार-बार कि झगड़ा हुआ, थप्पड़बाजी हुई या क्या हुआ? वो या तो मुख्यमंत्री खुद बताएं या उस वक्त जो शामिल थे। उसमें वहां पर ये अधिकारी (शिखर अग्रवाल) भी साथ खड़े थे। उस वक्त के आईजी श्रीवास्तव वो थे या और कोई इनके परिवार के लोग थे, वो बता सकता है। मैं कैसे बता सकता हूं? घटना हुई है। ये तो सिद्ध हो गया है, इनके खुद के लोग कहने लग गए हैं। पत्रकारों के लिए फ्लैट 75 लाख, शिखर के लिए विला 15 लाख का गहलोत ने कहा- आप 6 करोड़ में 40 विला की संपत्ति खरीद लो। कल मैंने सुना उनके परिवार में (विक्रेता के) किसी ने कहा है कि 15 लाख में ही देते हैं। मैंने कहा हमारे कुछ लोग जाकर मांगे 15 लाख में एक करोड़ के विला। हमारे मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को कहा है कि आप 75 लाख दीजिए और आपको फ्लैट देंगे। पत्रकारों के लिए तो 75 लाख और शिखर अग्रवाल के लिए 15 लाख है। वहीं, वापस लीज पर देकर वापस पैसा वसूल कर लो। 15 लाख के विला वाली स्कीम क्या शिखर अग्रवाल के लिए बनाई? गहलोत ने कहा- ऐसा सौदा तो हम सबको पसंद आएगा। अगर हम सबको आजादी मिले, पत्रकारों, आम जनता तो कितने लोगों का भला होगा? ये स्कीम खाली क्या शिखर अग्रवाल के लिए बनाई गई है? मुख्यमंत्री जवाब दे इसका। … ये भी पढ़ें… शिखर अग्रवाल के बाद उनकी पत्नी IPS प्रशाखा माथुर एपीओ:एक ही कंपनी से 40 विला खरीद मामले में ACB कर सकती है पूछताछ 40-विला खरीद में IAS शिखर अग्रवाल की जांच करेगी ACB:पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी; पद का दुरुपयोग कर कंपनी को गलत फायदा पहुंचाया विला-कॉटेज खरीद मामला,IAS शिखर अग्रवाल को सभी पदों से हटाया:IPS पत्नी के साथ खरीदी थी प्रॉपर्टी, फिर उसी कंपनी को लीज पर दी क्यों गिरी शिखर अग्रवाल पर गाज?:33 साल की नौकरी में पहली बार एपीओ, सरकार का क्लियर मैसेज, क्या संपत्ति खरीदना गलत? आसान सवालों में जानिए गहलोत बोले- शिखर अग्रवाल की CBI-ED से जांच करवाएं:एपीओ करने से काम नहीं चलेगा; सरकार के 3 साल में यह सबसे बड़ा घोटाला