राजस्थान हाईकोर्ट ने साइबर क्राइम जांच के दौरान फ्रीज किए गए बैंक खाते तुरंत खोलने और मुआवजे की मांग पर कारोबारियों को राहत नहीं दी। कोर्ट ने कहा कि खाताधारकों को पहले केंद्र सरकार की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के तहत शिकायत प्रक्रिया अपनानी होगी। जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि खाताधारक सीधे हाईकोर्ट नहीं आ सकते। तय शिकायत प्रक्रिया पूरी किए बिना अदालत का रुख करना जल्दबाजी होगी। मामला जोधपुर की दो व्यावसायिक फर्मों श्री राधे एंटरप्राइजेज और सीबीएन आर्ट एंड क्राफ्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। विजयवाड़ा साइबर क्राइम पुलिस के निर्देश पर इनके यस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक खाते नवंबर 2024 और जनवरी 2025 में फ्रीज किए गए थे। कारोबारियों ने 6 लाख के मुआवजे की मांग की थी कारोबारियों ने कहा था कि खाते बिना किसी पूर्व नोटिस के फ्रीज किए गए। उन्होंने खाते तुरंत खोलने और कुल 6 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की थी। उन्होंने यह भी दलील दी कि गृह मंत्रालय की एसओपी 2 जनवरी 2026 को जारी हुई, इसलिए इसे पुराने मामलों पर लागू नहीं किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ‘मदना राम बनाम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया’ मामले का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि खाताधारकों को संबंधित बैंक शाखा, जांच एजेंसी और जिला या राज्य स्तर के शिकायत अधिकारियों के जरिए तय प्रक्रिया अपनानी होगी। कोर्ट ने कहा कि अगर इस प्रक्रिया के बाद भी अधिकारी उचित कार्रवाई नहीं करते या बेवजह देरी करते हैं, तो खाताधारक दोबारा अदालत आ सकते हैं। फिलहाल, कोर्ट ने खाते खोलने या मुआवजा देने का आदेश नहीं दिया।