नॉन RAS से आईएएस में प्रमोशन से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिन में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। जस्टिस अनूप ढंढ की कोर्ट ने यह निर्देश अधिकारी सुरेश कुमार वर्मा, श्यामसुंदर ज्यानी, कार्तिकेय मिश्रा और नर्बदा इंदौरिया की याचिका को निस्तारित करते हुए दिए। हालांकि कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट ने सरकार को किसी विशेष तरीके से मामले का निर्णय करने के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया है। याचिका में अधिकारियों की ओर से कहा गया था कि पिछले साल दिसंबर में उनके आईएएस में प्रमोशन को लेकर संघ लोक सेवा आयोग बोर्ड (UPSC) में इंटरव्यू हुए थे। इंटरव्यू के बाद यूपीएससी ने 20 में से 4 अधिकारियों का चयन करके राज्य सरकार को ऑब्जर्वेशन (कमेंट्स) के लिए भेजा था। राज्य सरकार को अपने कमेंट्स के साथ 45 दिन में यूपीएससी को फिर से भेजना था, लेकिन कई महीने निकलने के बाद भी अब तक सरकार ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया। 20 अधिकारियों के हुए थे इंटरव्यू एडवोकेट राजीव सोगरवाल ने बताया- साल 2024 की 4 खाली पदों पर साल 2025 में नॉन RAS से आईएएस में प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसमें यूपीएससी बोर्ड में अलग-अलग सेवाओं के लिए 20 अधिकारियों के इंटरव्यू हुए थे। इनसें से 4 अधिकारियों का सिलेक्शन हुआ था। 10 महीने से फाइल अटकी पड़ी यूपीएससी ने इन अधिकारियों में से 4 का चयन करके राज्य सरकार को ऑब्जर्वेशन के लिए दिसंबर में भेज दिया। अखिल भारतीय सर्विस रेगुलेशन-1997 के रूल्स-6 के तहत राज्य सरकार को 45 दिन में अपने ऑब्जर्वेशन यूपीएससी को भेजने थे, लेकिन सरकार ने 10 महीने से फाइल रोक रखी है। ये अधिकारी हुए थे सिलेक्ट UPSC के इंटरव्यू में सिलेक्ट हुए इन 4 अधिकारियों में लेखा सेवा विभाग से सुरेश कुमार वर्मा, उच्च शिक्षा विभाग से श्याम सुंदर ज्यानी, सहकारिता विभाग से कार्तिकेय मिश्रा और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग से नर्मदा इंदौरिया है।