बीकानेर की देशनोक नगर पालिका में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करीब 2.83 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय गड़बड़ी के मामले में आरोपी कार्मिक सुरेंद्र सिंह टिंडल को राजस्थान हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनके निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है। टिंडल की नियुक्ति नगर पालिका बोर्ड के माध्यम से हुई थी। उनके अधिवक्ता परमेंद्र बोहरा ने इसी आधार पर निलंबन की कार्रवाई को चुनौती दी थी। 84 लाख रुपए के फर्जी बिल पारित कराने का आरोप मामले के अनुसार, सुरेंद्र सिंह टिंडल जब प्रधानमंत्री आवास योजना शाखा का कार्यभार संभाल रहे थे, तब 25 जून 2026 को 84 लाख रुपए के फर्जी बिल पारित किए गए। इसके बाद 1 जुलाई को नगर पालिका ने इन बिलों को निरस्त कराने के लिए जयपुर स्थित रूडिसको को पत्र तैयार किया। आरोप है कि यह पत्र ई-मेल से भेजने की जिम्मेदारी टिंडल को दी गई थी, लेकिन उन्होंने ईमेल नहीं भेजा। इसके बाद अधिकारियों ने 6 जुलाई को खुद ईमेल भेजा, लेकिन तब तक 8 जुलाई को सरकारी खाते से 84 लाख रुपए फर्जी खातों में ट्रांसफर हो चुके थे। 84 लाख लौटाए, जांच में मिले 49 फर्जी बिल मामला सामने आने के बाद 10 जुलाई को नगर पालिका ने कार्रवाई की। इसके बाद टिंडल ने 22 जुलाई 2026 को 84 लाख रुपए नगर पालिका के बैंक खाते में वापस जमा करा दिए। हालांकि, जांच कमेटी ने ऑनलाइन भुगतान पोर्टल की जांच की तो नवंबर 2025 से जून 2026 के बीच कुल 49 फर्जी बिलों के जरिए भुगतान किए जाने का मामला सामने आया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, इन बिलों के माध्यम से कथित तौर पर 2 करोड़ 83 लाख 80 हजार रुपए अवैध लाभार्थियों को भुगतान किए गए। 84 लाख रुपए वापस जमा होने के बाद भी 1 करोड़ 99 लाख 80 हजार रुपए की राशि बकाया बताई गई है। नियुक्ति बोर्ड से हुई, इसलिए निलंबन को दी चुनौती टिंडल की ओर से पैरवी कर रहे जोधपुर हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता परमेंद्र बोहरा ने बताया कि टिंडल की नियुक्ति नगर पालिका बोर्ड के माध्यम से हुई थी। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए बोर्ड की बैठक बुलाना जरूरी था। उनका तर्क था कि अधिशासी अधिकारी नियुक्ति प्राधिकारी नहीं हैं, इसलिए वे सीधे निलंबन का आदेश जारी नहीं कर सकते। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश पर रोक लगाई है।