राजस्थान हाईकोर्ट ने सरदार पटेल यूनिवर्सिटी ऑफ पुलिस, सिक्योरिटी एंड क्रिमिनल जस्टिस के कुलपति डॉ. आलोक त्रिपाठी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता सहायक प्रोफेसर विजय सिंह शेरों पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। यह रकम राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करानी होगी। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने नियुक्ति के साथ संबंधित कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर यह फैसला दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों और अदालत में चल रहे मुकदमों की जानकारी छिपाई। याचिका में सरदार पटेल यूनिवर्सिटी ऑफ पुलिस एक्ट-2012 की धारा 11 (1) की संवैधानिक वैधता और 12 दिसंबर 2023 को जारी कुलपति पद के विज्ञापन को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 2018 के नियमों के खिलाफ है। याचिकाकर्ता के खिलाफ कई मामले दर्ज सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष के वरिष्ठ वकीलों और अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा- याचिकाकर्ता ने राजस्थान हाईकोर्ट नियम-1952 के नियम 385-एफ का उल्लंघन किया। कोर्ट के सामने बताया गया कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों और छात्राओं की शिकायतों पर याचिकाकर्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 354ए, 354डी, 384 और 509 के तहत मामले दर्ज हैं। यौन उत्पीड़न (रोकथाम) अधिनियम और राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत भी मामले दर्ज हैं। कई मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। कोर्ट ने सुनवाई में पाया कि डॉ. आलोक त्रिपाठी की मूल नियुक्ति वर्ष 2020 में हुई थी, तब याचिकाकर्ता ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी। जब विश्वविद्यालय द्वारा याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई, तब उसने व्यक्तिगत स्कोर बराबर करने के लिए पीआईएल का सहारा लिया। जनहित याचिका का इस्तेमाल बदले की भावना के हथियार के रूप में नहीं किया जा सकता कोर्ट ने आदेश में कहा- जनहित याचिका का इस्तेमाल निजी बदले की भावना या पब्लिसिटी पाने के हथियार के रूप में नहीं किया जा सकता। कोर्ट ऐसे पब्लिसिटी स्टंट करने वालों से सख्ती से निपटने के लिए बाध्य हैं, ताकि न्याय प्रणाली की पवित्रता बनी रहे। इसी के साथ कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।