पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियारों की खेप आई, लेकिन न कोई चश्मदीद था और न ही कोई सुराग। दूसरी तरफ तस्करी का मास्टरमाइंड जेल में बैठकर पूरा नेटवर्क चला रहा था। इस पूरी गुत्थी को तेजतर्रार IPS अनुष्ठा कालिया ने सुलझाया। अनुष्ठा शादी के बाद कैडर बदलकर राजस्थान आई थीं। इंटेलिजेंस इनपुट की मदद से जांच में पाकिस्तान से लेकर जेल में बैठे मास्टरमाइंड तक का नेटवर्क बेनकाब हो गया। यह राजस्थान के उन 7 पुलिस अफसरों की कहानियों में से एक है, जिन्होंने असाधारण इन्वेस्टिगेशन से मुश्किल से मुश्किल केस सुलझाए। किसी ने 100 करोड़ की साइबर ठगी का नेटवर्क पकड़ा, तो किसी ने सात दिन पुराने शव से हत्या का राज खोला। इन सातों अफसरों को केंद्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक के लिए चुना गया है। आखिर इनकी जांच में ऐसा क्या खास था और कैसे खुलीं ये पेचीदा गुत्थियां? आखिर दक्षता अवॉर्ड के लिए चयन का पैमाना क्या है? जानिए राजस्थान एक्सप्लेनर में... सवाल- 1 : पाकिस्तान बॉर्डर पर क्या हुआ था, IPS अनुष्ठा ने कैसे सुलझाया केस? जवाब : खाजूवाला थाना क्षेत्र के चक 24 KND में बॉर्डर के बेहद करीब एक किसान के खेत में भारी चीज गिरने का धमाका हुआ। BSF टीम और खाजूवाला पुलिस मौके पर पहुंची तो खेत में कुछ पैकेट बिखरे पड़े थे। खोलने पर उसमें हथियारों का जखीरा था। 5 मेड इन चाइना पिस्टल, 325 कारतूस मिले। बीकानेर रेंज आईजी ओमप्रकाश के मुताबिक भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के खाजूवाला सेक्टर में पहली बार ड्रोन से हथियार गिराए गए थे। चुनौती ये थी मौके पर कोई सबूत नहीं था। फिर जांच अधिकारी अनुष्ठा ने केस को कैसे सुलझाया? आमतौर पर तस्करी जैसे मामलों में कोई न कोई सबूत मिल ही जाता है। लेकिन इस केस में न तो खेत में किसी के पैर के निशान थे, क्योंकि ड्रोन से हथियार गिरने के बाद मौके पर कोई आया ही नहीं था। न कोई CCTV फुटेज। मामले की जांच उस समय बीकानेर सर्कल ऑफिसर रहीं IPS अनुष्ठा कालिया को सौंपी गई। अनुष्ठा ने केस को 3 हिस्सों में बांटा- ड्रोन फॉरेंसिक : पुलिस की ओर से बताया गया था कि 10-15 किलो वजनी ड्रोन था। GPS लॉग से पता लगाया कि ड्रोन 12-15 किमी ही उड़ सकता है, मतलब ड्रॉप लोकेशन पहले से फिक्स थी। जांच में सामने आया कि हथियारों की खेप उठाने वाले लोगों को पहले से GPS लोकेशन भेजी जाती थी। इसी लोकेशन के आधार पर वे तय जगह पर पहुंचते और हथियारों की खेप उठाते थे। पैकेट एनालिसिस : कुछ रिपोट्‌र्स में दावा है कि पैकेट्स की पैकिंग हू-ब-हू वैसी थी, जैसे पहले पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए गिराए गए ड्रग्स के पैकेट पर मिलती थी। तकनीक और इंटेलिजेंस इनपुट : आईपीएस अधिकारी ने इस केस को सॉल्व करने के लिए तकनीकी पहलुओं का भी पूरा इस्तेमाल किया। इंटेलिजेंस इनपुट ने अनुष्ठा की खूब मदद की। जांच में सामने आया कि इस हथियारों की खेप मंगाने वाला मास्टरमाइंड सुखविंदर सिंह उर्फ सोनू जेल में बंद था। जेल से ही वह नेटवर्क चला रहा था। जेल से सोनू कैसे चलाता था नेटवर्क सुखविंदर सिंह उर्फ सोनू मूल रूप से पंजाब का रहने वाला है, जिसका कनेक्शन राजस्थान बॉर्डर के तस्करी नेटवर्क से है। कुछ मीडिया रिपोट्‌र्स में दावा है कि आरोपी श्रीगंगानगर जिले के रावला क्षेत्र का रहने वाला है। वह उस समय फरीदकोट जेल में बंद था। जेल के अंदर मोबाइल फोन रखकर वह सीमा पार बैठे पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क में था। पाकिस्तानी तस्कर ड्रोन उड़ाते थे और सुखविंदर सिंह उर्फ सोनू अपने साथियों को लोकेशन पास करता था - ‘खेप उस जगह गिरेगी, जाकर उठा लो।’ इसके बाद सबसे पहले मास्टरमाइंड को पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया और पूछताछ में धीरे-धीरे बाकी नेटवर्क और गिरोह के सदस्यों के खिलाफ सबूत और प्रमाण जुटाकर केस को सॉल्व करने में कामयाबी हासिल की। जुलाई तक इस मामले से जुड़े 4 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर केस को सॉल्व कर लिया था। कैडर बदलकर राजस्थान आई थीं अनुष्ठा दिल्ली की रहने वाली अनुष्ठा कालिया को शुरुआत में एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) कैडर मिला था। उन्होंने अंडमान निकोबार में सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने अपने बैचमेट और मूल रूप से जयपुर के रहने वाले IPS अधिकारी विशाल जांगिड़ से शादी की। शादी के आधार पर सितंबर 2025 में उनका कैडर बदलकर राजस्थान कर दिया गया। सवाल 2 - बाकी 6 अफसरों ने कौन-कौनसे मुश्किल केस सुलझाए? 7 दिन पुराना शव वाला चर्चित केस क्या है? जवाब : आइए, सिलसिलेवार बताते हैं, बाकी अफसरों ने कौनसे असाधारण काम किए… 1. अजेय सिंह राठौड़, आईपीएस किशनगढ़ में करीब 6 माह पहले एक युवक का सात दिन पुराना शव मिला था। बॉडी पूरी तरह डी-कंपोज हो चुकी थी। परिजनों ने हत्या का आरोप लगाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान किशनगढ़ सीओ रहे अजेय सिंह राठौड़ ने मृतक के मोबाइल से टॉर्चर का पुराना वीडियो निकाला और लेयर्ड वॉइस एनालिसिस से जांच कराई। इसी को पुख्ता सबूत बनाकर हत्या के आरोपी दंपती को 24 घंटे में गिरफ्तार कर लिया था। 2. कांबले शरण गोपीनाथ, आईपीएस राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर देशभर से 100 करोड़ की ठगी की 4 हजार से अधिक शिकायतें थी। 17 आरोपी गिरफ्तार किए। म्यूल बैंक खातों के नेटवर्क में शामिल 5 बैंक अधिकारियों को भी जेल पहुंचाया। 3. मनीष कुमार, आईपीएस ‘दृश्यम’ फिल्म देख वृद्धा की हत्या की साजिश रचने का मामला सामने आया था। आरोपी ने हत्या के बाद शव पर पेट्रोल डाल कर जला दिया था। केस को रिओपन कर आरोपी को पकड़ा। 4. जतिन जैन, आईपीएस गैंगरेप केस में 7 दिन में चार्जशीट पेश की। नागौर में पोस्टिंग के दौरान इस केस में त्वरित न्याय के लिए अधिकारी ने जांच को प्राथमिकता दी। बयान और मेडिकल रिपोर्ट समय पर लेकर 7 दिन में चार्जशीट पेश कर दी। 5. रोशन मीणा, आईपीएस टोंक में 70 वर्षीय वृद्धा की हत्या कर चांदी के कड़े लूटे और शव को कचरे में फेंक दिया था। FSL और डीएसपी सहित 10 टीमें लगाकर ब्लाइंड मर्डर को सुलझाया। 6. प्रेम कुमार, आरपीएस ऑपरेशन ’शटर डाउन’ में 4 राज्यों में छापे मारे और 51 आरोपी गिरफ्तार किए। झालावाड़ डीएसपी ने एसआईटी का नेतृत्व कर 4 राज्यों के 30 ठिकानों पर छापे मारे। स्टेट नोडल ऑपरेटर और कलेक्ट्रेट कर्मियों सहित 51 आरोपी पकड़े। सवाल- 3 : केंद्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक क्या है और राजस्थान के अफसरों को किस-किस श्रेणी में चुना गया? जवाब : ये पुलिस अनुसंधान (इन्वेस्टिगेशन) का देश का सबसे नया और बड़ा पदक है। MHA (मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स) ने 1 फरवरी 2024 को इसे शुरू किया। केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक की घोषणा हर साल 31 अक्टूबर को की जाती है। 2026 में 490 में से 14 अधिकारी CBI के हैं, बाकी राज्य पुलिस, NSG, CAPF से अधिकारियों को दिया जाएगा। 4 श्रेणी हैं - स्पेशल ऑपरेशन, इंटेलिजेंस, अनुसंधान और फॉरेंसिक विज्ञान। राजस्थान के 7 अफसरों को अनुसंधान श्रेणी में चुना गया है। इन 7 पुलिस अधिकारियों ने बेहतरीन तकनीक और इन्वेस्टिगेशन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर खास पहचान दिलाते हुए राजस्थान का गौरव बढ़ा दिया। …. ये खबर भी पढ़िए… राजस्थान के लाखों वाहनों की ‘दिल्ली एंट्री’ बैन:पेट्रोल-डीजल भरवाने के भी अलग नियम, पकड़े गए तो 10 हजार रुपए जुर्माना सोचिए, आप अपनी मर्सिडीज-बीएमडब्ल्यू लेकर दिल्ली के लिए रवाना होते हैं। दिल्ली बॉर्डर पर पहुंचते ही पुलिस आपको कहे - आप गाड़ी लेकर दिल्ली में नहीं घुस सकते, वापस जाइए, वरना गाड़ी सीज कर देंगे। पूरी खबर पढ़िए…