नमस्कार, विधायकजी ने लोकतंत्र की मजबूती का दावा करते हुए कहा- ये मजबूत नहीं होता तो 122 राज्यों में हमारी सरकार नहीं होती। चुनाव जीतने के बाद सरपंच के पति गोमाता के चरणों में लमलेट हो गए। पूर्व विधायक को चैन से रोटी खाने का वक्त भी नहीं मिला और राजसमंद में दिखा चोरों का टीमवर्क। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. विधायकजी बोले- 122 राज्यों में 'पार्टी का राज' लोकतंत्र का महापर्व चल रहा है। वोट डाले जा रहे हैं। मांगें उठ रही हैं। आरोप लग रहे हैं। बहिष्कार हो रहे हैं। ढोल-नगाड़े बज रहे हैं। पैरों में झुकने के रिकॉर्ड टूट रहे हैं। पुराने वादों पर अधूरा पड़े होने के आरोप लग रहे हैं। नई डिजाइन के वादे मार्केट में नए ढंग से पेश किए जा रहे हैं। लोकतंत्र को लेकर एक युद्ध दिल्ली में भी लड़ा जा रहा है। उधर से आरोप उठते हैं कि लोकतंत्र को कमजोर कर दिया गया है। फिर दूसरी आवाज आती है- नहीं-नहीं। लोकतंत्र की हत्या कर दी है। कोई कहता है कि लोकतंत्र को संविधान की संजीवनी पिलाओ। कुल मिलाकर लोकतंत्र वह औजार है जिसका इस्तेमाल करके सत्ता नामक कुर्सी तक पहुंचा जा सकता है। झुंझुनूं के छोटे से गांव बड़वासी में माननीय विधायक महोदय उक्त विषय (लोकतंत्र) को लेकर विचार प्रकट कर रहे थे। वो गांव की धरा से ही दिल्ली में मचल रहे विपक्ष के प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। दावा कर रहे थे कि लोकतंत्र बहुत मजबूत हो चुका है। हवाला देने के लिए उन्होंने बात को इस तरह पेश किया- अगर लोकतंत्र मजबूत नहीं होता तो बताओ क्या हमारी पार्टी 122 राज्यों में राज करती? जहां तक करंट अफेयर्स का मामला है, भारत में वर्तमान में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश बताए जाते हैं। लगता है विधायकजी की कल्पना में पार्टी का विस्तार नेपाल, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका और इंडोनेशिया तक हो गया है। चुनावी भाषण में जोश होना चाहिए। जोश में आदमी कभी-कभी इधर-उधर निकल जाता है। लेकिन विधायकजी तो बहूत दूर तक निकल गए। पार्टी संगठन के लोग तो बयान सुनकर यही कह रहे होंगे- आपके मुंह में घी-शक्कर। 2. पंचायत चुनाव और 'कंठ खारा' पंचायतीराज चुनाव चल रहे हैं। चुनाव में पंच-सरपंचों के नतीजे हाथों-हाथ आ रहे हैं। जिला परिषद और पंचायत समितियों के नतीजों के लिए दीपावली बाद तक इंतजार करना पड़ेगा। चुनाव जीतने के लिए अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता। लिहाजा चना सिका हुआ होना चाहिए। उसमें थोड़ा नमक और हल्की मिर्च भी होनी चाहिए। इसके साथ ‘कंठ खारा’ करने का प्रबंध हो तो क्या कहना। टीम के लोगों का उत्साह बनाए रखने के लिए विविध अल्पकालिक योजनाएं चल रही हैं। एक पर्ची सोशल मीडिया पर खूब घूम रही है। जिसमें विशिष्ट प्रकार के स्लोगन का इस्तेमाल किया गया है। स्लोगन है- कंठ खारा वोट थारा। स्लोगन ऐसा है कि सुरा-प्रेमी इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते। स्लोगन पढ़कर उनकी रगों में जोश दौड़ने लगे। पर्चियां चुनावी मौसम के लिए ही हैं। मौसम को और अधिक सुस्पष्ट बनाने के लिए पर्ची पर डिमांड अंकित की जाती है। पर्ची दिखाकर सिर्फ बोतलें नहीं मिल रही हैं, बल्कि संभव है कि ठेकों पर वोटरों की गिनती हो रही हो और चुनाव से पहले ही रुझान घोषित हो रहे हों। बाड़मेर में तो पूरी पोलिंग पार्टी कंठ खारा करते हुए वीडियो में कैद हो गई। इस पर काफी हो हल्ला हुआ। पोलिंग पार्टी में सरकारी कर्मचारी होते हैं। चुनाव जैसा संवेदनशील काम होशो-हवास में होना कठिन है, ऐसे में इसे आसान करने के लिए… खैर, जो इसका सेवन नहीं करते उन्हें इसके नुकसान पता हैं। जो सेवन करते हैं वे इसके गुणों का बखान करते हैं। बाकी गुण-दोष अस्पतालों के रिकॉर्ड में दर्ज हैं। पंच-सरपंच जीत कर अनोखा अभिवादन कर रहे हैं। कोई क्रेन से लटककर नमस्कार कर रहा है। कोई पत्नी के जीतने पर गोमाता के पैरों में लोटपोट हो रहा है। कहीं उपसरपंच का फैसला पर्ची निकालकर किया जा रहा है। कहीं-कहीं पुलिस के डंडे को जोर भी दिख रहा है। 3. चुनाव के बीच ‘टीमवर्क’ इधर पुलिस पंचायत चुनाव में व्यस्त है। उधर चोरों की मौज बहार है। जिस तरह चुनाव का एक सीजन होता है। उसी प्रकार चोरी का भी एक सीजन होता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमानों की सबसे ज्यादा प्रतीक्षा चोरों को रहती है। चोर इसी ताक में रहते हैं कि कब ठंड बढ़ना शुरू हो और कब उनका कारोबार फले-फूले। राजसमंद के भीम की घटना है। चोरों ने एक बड़ी दुकान को निशाना बनाया। आधी रात के बाद शॉल और कंबल ओढ़े दो चोरों ने सरिये के सहारे शटर को बीच से उठाने का प्रयास किया। यूं तो एक और एक ग्यारह होते हैं। लेकिन यहां ये चोर एक और एक नहीं थे। बल्कि हाथ बंटाने के लिए तीसरा आया, फिर चौथा आया। फिर पांचवां, छठा और सातवां। इस प्रकार कई चोरों का जमावड़ा लग गया। सभी ने मिलकर अच्छा टीमवर्क दिखाया और पलक झपकते ही भारी-भरकम शटर को इतना ऊंचा कर लिया कि नीचे से भीतर सरका जा सके। इसके बाद मुख्य चोर भीतर घुसा और अंदर से माल समेटकर निकल आया। जाते-जाते एक चोर ने जूते से दबाकर शटर को फिर उसी खांचे में फिट कर दिया, जिसमें वह था। आजकल घटनाओं के लिए यह आम बात है कि ऊपर वाला देखता है। क्योंकि ऊपर सीसीटीवी लगा होता है। भीम के इस चोर-दल की करतूत सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। चोरी के वक्त भले पुलिस कुंभकर्ण के अवतार में थी। लेकिन अब यकीनन पुलिस के जवान भीम बनकर चोरों की तलाश में जुटे हैं। पुलिस भी टीमवर्क के जरिए चोरों तक पहुंचने का दावा कर रही है। 4. चलते-चलते... विधायक-पूर्व विधायक, मंत्री-पूर्व मंत्री सबके सब चुनाव में बुरी तरह लगे हुए हैं। यूं तो कहा जा सकता है कि अच्छी तरह लगे हुए हैं। लेकिन ‘बुरी तरह’ कहने में बात में वजन आ जाता है। पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी की बेटी चुनाव लड़ रही है। पूर्व विधायकजी बेटी के प्रचार में जमकर पसीना बहाते दिखे। हालांकि जनता पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि अमुक उम्मीदवार का बैकग्राउंड क्या है? सोशल मीडिया पर उसके कितने फॉलोअर्स हैं? यूट्यूब पर उसने कितने सब्सक्राइब कमाए हैं? या फिर उसके दादा, ताया, पिता, भाई, पुत्र किस पद पर विराजमान हैं। चुनाव में जनता ने अच्छे-अच्छों को पानी पिला दिया। यहां तो गांव में जिसकी पैठ होगी, व्यवहार देखा-जांचा-परखा होगा। भले-बुरे की समझ होगी। नीयत साफ होगी और व्यक्तित्व भरोसे का होगा। उसी को जनता सिर-माथे बैठाएगी। बाकी पिताजी ने कोई कोर-कसर छोड़ी नहीं है। इतनी भी फुर्सत नहीं कि घर में बैठकर दाल-फुल्की और रायता चैन से ग्रहण कर सकें। गाड़ी में दौड़ रहे हैं। दौड़ते हुए खा रहे हैं। पीछे बैठा सहायक इसी मौके की तलाश में है कि पूर्व विधायक क्या ऐसा अनोखा करें कि बढ़िया रील बन जाए और सोशल मीडिया पर ध्यान खींच ले। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।