राजस्थान के स्कूलों में अब बच्चों को कोल्ड ड्रिंक की जगह छाछ और नींबू पानी पीने के फायदे बताए जाएंगे। बच्चों के माता-पिता को भी टिफिन में क्रीम वाले बिस्किट-चॉकलेट की जगह एपल-अमरूद पैक करने को कहा जाएगा। स्कूल परिसर में ‘शुगर बोर्ड’ लगाकर बताया जाएगा कि कोल्ड ड्रिंक और पैकेज्ड फूड आइटम में कितने चम्मच चीनी है। इनको खाने से कौन-कौनसी खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं। सभी स्कूलों में दिवाली तक शुगर बोर्ड लगाने होंगे। दरअसल, स्कूली बच्चों में बढ़ते डायबिटीज और मोटापे के मामलों को देखते हुए शिक्षा विभाग ने यह फैसला लिया है। आंकड़े बताते हैं कि ‘मिशन मधुहारी’ के तहत राजस्थान में दिसंबर 2025 तक 1,700 बच्चे टाइप-1 डायबिटीज के शिकार थे। अब ये संख्या बढ़कर 2,817 हो गई है। क्या है ‘शुगर बोर्ड’ लगाने का फैसला? कैसे इसके जरिए जागरूक किया जाएगा? पढ़िए मंडे स्पेशल स्टोरी में… शुगर बोर्ड पर दिखेगा चीनी का हिसाब शुगर बोर्ड का सबसे दिलचस्प हिस्सा बच्चों की डेली की पसंद से जुड़ा होगा। इसमें अलग-अलग खाद्य और पेय पदार्थों में मौजूद चीनी की मात्रा को चम्मच के रूप में दिखाया जाएगा। इन उदाहरणों से बच्चों को समझाया जाएगा कि स्वाद के साथ-साथ फूड पैकेट पर लिखी पोषण संबंधी जानकारी पर ध्यान देना जरूरी है। किसी भी पैकेज्ड फूड में कितनी चीनी है, इसका अंदाजा होने पर बच्चे खुद अपनी पसंद को लेकर फैसला कर सकेंगे। ज्यादा चीनी से हो सकती हैं ये बीमारियां, समझाएंगे टीचर शुगर बोर्ड पर बच्चों को ज्यादा चीनी खाने से होने वाले नुकसान की जानकारी भी दी जाएगी। इसमें टाइप-2 डायबिटीज यानी मधुमेह का खतरा, बच्चों में बढ़ता मोटापा, दांतों में सड़न और कैविटी, हार्ट से संबंधित बीमारियां और हाई ब्लड प्रेशर जैसी डिटेल लिखी जाएगी। बोर्ड का उद्देश्य बच्चों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें कम उम्र से ही खानपान के प्रति जागरूक करना है। बच्चों में खानपान की आदतें कम उम्र से विकसित होती हैं। अगर बच्चा रोज मीठे पेय पदार्थों (कोल्ड ड्रिंक्स) और पैकेट बंद फूड प्रोडक्ट का अधिक सेवन करता है तो आगे चलकर भी उसकी यही आदत बनी रह सकती है। ऐसे में स्कूलों में इस तरह की जानकारी देना जरूरी माना जा रहा है। टीचर बताएंगे कोल्ड ड्रिंक की जगह नींबू पानी के फायदे बच्चों को कोल्ड ड्रिंक, चिप्स, चॉकलेट के प्रति जागरूक करने के साथ इनकी जगह फायदेमंद चीजों के बारे में भी समझाया जाएगा। जैसे- कोल्ड ड्रिंक के स्थान पर नींबू पानी और छाछ जैसे ड्रिंक्स को लेने की सलाह दी जाएगी। पैकेट बंद और जंक फूड की जगह ताजे फल, मेवे और अंकुरित अनाज खाने के फायदे बताए जाएंगे। माता-पिता को भी बच्चों के टिफिन में बैलेंस डाइट (संतुलित आहार) रखने के लिए जागरूक किया जाएगा। इसका एक बड़ा मकसद बच्चों के साथ अभिभावकों की खानपान संबंधी समझ को भी बेहतर करना है। कई बार बच्चे वही चीजें खाते हैं जो घर में खरीदी जाती हैं या टिफिन में रखकर दी जाती हैं। ऐसे में अगर माता-पिता को भी खाद्य पदार्थों में मौजूद अतिरिक्त चीनी की जानकारी होगी तो वे खरीदारी और बच्चों के टिफिन के लिए अच्छे विकल्प चुन सकेंगे। स्कूल में कहां लगेगा ‘शुगर बोर्ड’ और कैसे होगा इस्तेमाल? स्कूल परिसर में शुगर बोर्ड ऐसी जगह पर लगाया जाएगा, जहां बच्चों की नजर आसानी से पहुंच सके। स्कूल के नोटिस बोर्ड, कॉरिडोर, कैंटीन या बच्चों के नियमित आने-जाने वाले स्थान पर इसे लगाया जा सकता है। क्लास टीचर शुगर बोर्ड पर दिए गए उदाहरणों के बारे में बच्चों को समझाएंगे भी कि अलग-अलग खाद्य पदार्थों में चीनी की मात्रा कितनी होती है। इससे बच्चे कोल्ड ड्रिंक और पैकेट जूस में मौजूद चीनी की तुलना कर सकेंगे। इसी तरह उन्हें पैकेट पर लिखी सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी पढ़ने के लिए भी प्रेरित किया जा सकेगा। WHO के सर्वे में आए थे चौंकाने वाले नतीजे राजस्थान में स्कूलों में शुगर बोर्ड लगाने की जरूरत समझने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का जयपुर में किया गया 2022 का सर्वे अहम है। इसमें 13 से 17 साल के 4,299 स्कूली बच्चों को शामिल किया गया था। सर्वे के मुताबिक, जयपुर के 35.7% बच्चे रोजाना कम से कम एक बार मीठे पेय यानी कोल्ड ड्रिंक या पैकेट वाले ड्रिंक पीते थे। वहीं, 25.4% बच्चे कुकीज, केक और पेस्ट्री जैसे मीठे खाद्य पदार्थ रोजाना या उससे ज्यादा बार खाते थे। बच्चों की शारीरिक गतिविधि भी कम मिली। 80.8% बच्चे रोज कम से कम 60 मिनट की शारीरिक गतिविधि नहीं कर रहे थे। सर्वे में 13% बच्चे ओवरवेट और 3.1% मोटापे की श्रेणी में मिले। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बच्चों के लिए एक दिन में 25 ग्राम यानी 5 से 6 चम्मच से ज्यादा एडेड शुगर देना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। कुल कैलोरी का 10% से कम हिस्सा फ्री शुगर से आना चाहिए। राजस्थान के सभी स्कूलों में लागू, बोर्ड नहीं लगा तो कार्रवाई स्कूलों में शुगर बोर्ड लगाने की सिफारिश राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने की थी। आयोग ने 2 जुलाई 2025 को सभी राज्यों के शिक्षा विभागों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने के लिए कहा था। राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने 1 अक्टूबर 2026 को प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय और समग्र शिक्षा के अधिकारियों को पत्र भेजा। अब प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने 21 अक्टूबर को सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं।