जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की बैठक के दौरान केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के आधुनिकीकरण और नई सैन्य संरचनाओं के बारे में बताया। रक्षा मंत्री ने कहा- आधुनिक युद्ध में ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम जैसी तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसलिए भारतीय सेनाओं का आधुनिकीकरण समय की जरूरत है। रक्षा मंत्री मंगलवार को रक्षा मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस दौरान रक्षा मंत्री ने कहा- रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-ईरान वॉर के चलते युद्ध लड़ने के तरीके बदल गए हैं। सेनाओं को केवल आज की जरूरतों के लिए नहीं, भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भी तैयार करना जरूरी है। ऐसे में 2026-27 में देश का डिफेंस बजट बढ़ाकर 7 लाख 85 हजार करोड़ रुपए हो गया है। बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और समिति के सदस्य उपस्थित रहे। राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार आधुनिकीकरण के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों पर काम कर रही है। इनमें बजट और पूंजीगत खरीद (फाइनेंस), रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता तथा मानव संसाधन और सैन्य संरचनाओं में सुधार शामिल हैं। 7.85 लाख करोड़ हुआ रक्षा बजट रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त साल FY 2026-27 में देश का कुल रक्षा बजट बढ़कर 7 लाख 85 हजार करोड़ रुपए हो गया है। इसमें सेना के आधुनिकीकरण और पूंजीगत खरीद के लिए 2 लाख 19 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। सरकार ने रक्षा आधुनिकीकरण के बजट में लगातार बढ़ोतरी की है। सरकार का उद्देश्य सशस्त्र बलों की आवश्यकताएं पूरी करने के साथ भारतीय उद्योगों और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा देना है। 1.78 लाख करोड़ हुआ रक्षा उत्पादन राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में हुई प्रगति का जिक्र करते हुए बताया कि साल 2014-15 में देश का रक्षा उत्पादन करीब 46,429 करोड़ रुपए था। यह FY 2025-26 में बढ़कर करीब 1 लाख 78 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया। MSME से लेकर बड़ी कंपनियां तक रक्षा क्षेत्र में योगदान दे रही हैं। अश्नि, भैरव और शक्तिबाण जैसी नई सैन्य संरचनाएं शामिल रक्षा मंत्री ने कहा कि बदलती युद्ध प्रणाली के अनुसार तीनों सेनाओं की संरचनाओं और सैन्य इकाइयों में सुधार किए जा रहे हैं। भारतीय सेना में अश्नि, भैरव और शक्तिबाण जैसी नई सैन्य संरचनाओं का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि ये बदलती परिचालन जरूरतों और युद्ध की परिस्थितियों के अनुरूप उपयोगी साबित हो रही हैं। ‘हर इन्फेंट्री बटालियन के पास होगी अपनी ड्रोन यूनिट’ रक्षा मंत्री ने कहा कि अब इन्फेंट्री बटालियन के पास अपनी ड्रोन यूनिट (अश्नि प्लाटून) होगी। इससे पैदल सैनिकों को दुश्मन की जानकारी जुटाने के लिए दूसरे सैन्य संसाधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। अपनी ड्रोन यूनिट होने से दुश्मन की गतिविधियों की जानकारी जल्दी मिलेगी और उसके आधार पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। भैरव यूनिट बनने से छोटे और सीमित ऑपरेशन के लिए स्पेशल फोर्सेज पर निर्भरता कम होगी। इससे स्पेशल फोर्सेज को ज्यादा मुश्किल और बड़े रणनीतिक महत्व वाले ऑपरेशन पर ध्यान देने का मौका मिलेगा। सेना की योजना ऐसी 25 बटालियन तैयार करने की है। वहीं, शक्तिबाण रेजिमेंट से आधुनिक युद्ध में दुश्मन की लोकेशन का पता लगाने से लेकर उस पर हमला करने की प्रक्रिया को तेज करना है। रक्षा मंत्री बोले- आत्मनिर्भर भारत से मजबूत होगी राष्ट्रीय सुरक्षा राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार ऐसा रक्षा इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में काम कर रही है, जिसमें भारतीय सेनाओं की जरूरतों के मुताबिक तकनीक विकसित हो, घरेलू उद्योगों की भागीदारी बढ़े और विदेशी निर्भरता कम हो। समिति के सदस्यों के सुझावों पर अमल का आश्वासन बैठक के समापन से पहले रक्षा मंत्री ने अधिकारियों से भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण पर प्रेजेंटेशन देने को कहा। राजनाथ सिंह ने आश्वासन दिया कि सदस्यों की ओर से दिए गए सुझावों पर जहां तक संभव होगा, अमल किया जाएगा।